जैसा की हम सब जानते है हाल ही में राहुल गांधी ने देश के 20 फीसदी गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी देने वाले एक बड़ी योजना की घोषणा की है।
नई दिल्ली: जैसा की हम सब जानते है हाल ही में राहुल गांधी (rahul gandhi) ने देश के 20 फीसदी गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी देने वाले एक बड़ी योजना की घोषणा की है। इसके तहत करीब 5 करोड़ परिवारों को हर साल 72,000 रुपये की न्यूतनत आय की गारंटी दी जाएगी। घोषणा के दौरान उन्होंने गरीबों को लुभाने के लिए काफी तरह की बातें कही है। उसी संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक(reserve bank of india) के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी (Y V reddy) का मानना है कि दूसरी कल्याणकारी योजनाओं की मद में कटौती तथा राजकोषीय घाटा बढ़ने देने पर ही न्यूनतम आय गारंटी योजना को लागू किया जा सकता है।

आपको इस बात से अवगत करा दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी का मानना है कि दूसरी कल्याणकारी योजनाओं की मद में कटौती और राजकोषीय घाटा बढ़ने देने पर ही न्यूनतम आय गारंटी योजना (NYAY yojana) को लागू किया जा सकता है। जी हां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर देश के 20 प्रतिशत अत्यधिक गरीब लोगों को 72,000 रुपये की सालाना न्यूनतम आय की गारंटी देने का वादा किया है। राहुल गांधी ने Nyay Yojna को गरीबी पर आखिरी वार बताया है। उन्होंने बहुत ही सीधे शब्दों में कहा है कि कांग्रेस ने इस योजना के वित्तीय प्रभावों पर अध्ययन किया है और साथ ही इसमें प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया है।
योजना को बजट की सीमा में ही लागू करने की हिदायत
इस पर रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकारों के लिए इस तरह की योजना को क्रियान्वित करना मुश्किल होगा। क्योंकि वे वित्त और कर्ज सीमा के लिए काफी हद तक केंद्र पर निर्भर होते हैं। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया की मैं सिर्फ केंद्र-राज्य के राजकोषीय संबंधों के संदर्भ में बात कर रहा हूं। राज्य सरकारों के पास बजट सीमित होता है और वे अधिक पैसा नहीं खर्च कर सकते, क्योंकि कर्ज लेने के लिए भारत सरकार की अनुमति की जरूरत होती है। ऐसे में राज्यों के ऋण की सीमा है। यदि वे न्यूनतम आय गारंटी जैसी कोई योजना लागू करते हैं तो उन्हें इसे अपने बजट की सीमा में ही लागू करना होगा।
जानकारी दें कि रेड्डी ने कहा कि केंद्र के पास अपना राजकोषीय घाटा बढ़ाने की संभावना होती है और वित्तीय मोर्चे पर कोई अधिक अड़चनें नहीं होतीं। ऐसे में राहुल गांधी ने इस योजना को गरीबी पर आखिरी वार बताया है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि कांग्रेस ने इस योजना के वित्तीय प्रभावों पर अध्ययन किया है और साथ ही इसमें प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया है। यह प़ूछे जाने पर कि क्या केंद्र और राज्य ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदारी कर सकते हैं, रेड्डी ने कहा कि इससे जटिलताएं बढ़ेंगी।
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