RBI Credit Policy : आरबीआई ने घटाया रेपो रेट, सस्ता होगा कर्ज

RBI Credit Policy : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को हुई मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में रेपो रेट को घटने का फैसला किया है। रेपे रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके बाद यह घट कर 6.25 फीसदी पर आ गई हैं। इससे पहले अगस्त 2018 में आरबीआई ने रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया था। इसी दर पर वह बैंकों को एक दिन के लिए उधार देता है। इसके बढ़ने और बढ़ने से बैंकों का कर्ज महंगा या सस्ता होता है। यह बैठक आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता आज हुई पहली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी।

RBI Credit Policy

अभी तक कितनी थीं दरें

-रेपो रेट 6.50 फीसदी
-रिवर्स रेपो रेट 6.25 फीसदी

अगस्त 2017 के बाद पहली घटी रेपो दर
आज हुई मॉनिटरी कमेटी की बैठक में रेपो रेट को घटाने के फैसले के पक्ष में 4 लोगों ने और इसके विरोध में 2 सदस्यों ने वोट दिया। अगस्त 2017 के बाद पहली बार आरबीआई ने रेपो रेट को घटाया है।

किसानों को आसानी से मिलेगा लोन
इस दौरान उन्होंने बताया कि किसानों के लिए एक बड़ा फैसला हुआ है। इसके तहत किसानों को बिना गारंटी के मिलने वाले लोन की सीमा को 1 लाख रुपये बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने से किसानों के लिए इस सीमा को बढ़ाया जा रहा है।

जीडीपी का अनुमान जताया
आरबीआई ने जीडीपी वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी का अनुमान 7.4 फीसदी का जताया है। वहीं महंगाई को लेकर आरबीआई का अनुमान है कि यह वर्ष 2019-20 की पहले छह माह में 3.2 से लेकर 3.4 फीसदी के बीच रहेगी।

आरबीआई मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक की प्रमुख बातें
-आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट कम करने के फेवर में किया वोट।
-वित्तवर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी का अनुमान 7.4 फीसदी का जताया।
-CPI को लेकर कहा कि यह जनवरी से मार्च 2019 तक 2.4 फीसदी पर और अप्रैल से लेकर सितंबर 2019 तक यह 3.2 से लेकर 3.4 फीसदी तक रह सकती है।
-आरबीआई गवर्नन ने बजट प्रस्तावों से एग्रीकल्चर डिमांड बढ़ने की उम्मीद जताई।
-NBFC को लोन को लेकर आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि रिस्क वेटेज को रेटिंग से जोड़ें।

अर्बन कोपरेटिव बैंकों को लेकर बड़ी घोषणा
आरबीआई गवर्नर शाक्तिकांत दास ने क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा के दौरान बताया कि अर्बन कोपरेटिव बैंकों के नियमन के लिए उसे एक अम्ब्रेला आर्गनाइजेशन बनाने का सुझाव मिला है। उन्होंने बताया कि आरबीआई इस प्रस्ताव पर पॉजिटिबली विचार करेगा और जल्द ही इस बारे में फैसला किया जाएगा।

ये है क्रेडिट पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

रेपो रेट (Repo rate)
रेपो रेट (Repo rate) वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई (RBI) कर्ज (loan) देता है. बैंक (Bank) इस कर्ज से ग्राहकों को लोन (loan) देते हैं. रेपो रेट (Repo rate) कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. जैसे कि होम लोन (Home Loan), व्हीकल लोन (Auto loan) वगैरह.

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)
जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है. यह वह दर होती है जिस पर बैंकों (Bank) को उनकी ओर से आरबीआई (RBI) में जमा धन पर ब्याज (Interest rates) मिलता है. रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) बढ़ा देता है, ताकि बैंक (Bank) ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे.

सीआरआर (CRR)
देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक (Bank) को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है. इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं.

एसएलआर (SLR)
जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर (SLR) कहते हैं. नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है. आरबीआई (RBI) जब ब्याज दरों (Interest rates) में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर (CRR) बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन (Loan) देने के लिए कम रकम बचती है.

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