पीएम आवास योजना का उद्देश्य है कि सभी को पक्का मकान मिले। हां इस योजना की कुछ शर्तें जरूर हैं जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। सबसे पहले तो ऐसे लोग जिनके पास इस पहले से घर है वह इस योजना का लाभ नहीं उठा सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना का नियम है कि लाभ उसे ही मिलेगा जिसके पास पहले से कोई पक्का मकान नहीं होगा। ऐसे और भी नियम हैं जिनके बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं।
पहली शर्त
पक्के घर का लाभ उठाने वाले माता-पिता के विवाहित बेटे-बेटियां तो वैसे भी अलग परिवार माने जाते हैं। हालांकि, पति-पत्नी दोनों PMAY का लाभ नहीं ले सकते। यानी, बेटे-बहू या बेटी-दामाद के नाम पर हर हाल में एक ही मकान पर सब्सिडी मिल सकती है। यह उनकी मर्जी होगी कि मकान का मालिकाना हक कोई एक अपने पास रखें या दोनों साथ-साथ। आगे पढ़ें कितनी ब्याज पर कितनी सब्सिडी देगी सरकार।
दूसरी शर्त
प्रधानमंत्री आवास योजना की शर्तों में यह भी कहा गया है कि कमाई करने वाले किसी विवाहित या अविवाहित बालिग सदस्य को अलग परिवार माना जा सकता है, बशर्ते उसके नाम पर देशभर में कहीं कोई पक्का मकान नहीं हो। यानी, पक्का मकान वाले माता-पिता के नौकरीपेशा बेटा और बेटी भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते खुद उसके नाम पर देश भर में कहीं कोई पक्का मकान नहीं हो।
आधार कार्ड जरूरी है
इस योजना के लिए आवेदन के वक्त अविभाजित परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड का नंबर देना जरूरी है। इसमें पति-पत्नी, और अविवाहित बेटे और बेटी शामिल हैं। शादी के बाद बेटा या बेटी इस योजना के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं।
चौथी शर्त
इस योजना की एक और शर्त है कि परिवार के किसी सदस्य को भारत सरकार की किसी योजना के तहत आवास योजना का लाभ ना मिला हो। यदि परिवार में किसी सदस्य को सरकारी योजना के तहत आवास का लाभ मिला है उसके किसी अन्य सदस्य को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है।
पीएम आवास योजना की प्रोग्रेस रिपोर्ट
सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ो के मुताबिक, मार्च, 2018 तक 51 लाख आवासों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 56.90 लाख लाभार्थियों को मकानों की स्वीकृति दी गई है। 51.39 लाख लाभार्थियों को पहली किस्त मिल चुकी है। 31.03 लाख लाभार्थियों ने अपने आवासों की छत बना ली है और 16.05 लाख लाभार्थियों का गृह निर्माण लगभग समाप्ति की ओर है। छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थियों की संख्या सर्वाधिक है। इन राज्यों के लोगों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने आवासों का निर्माण किया है।


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