उच्चतम न्यायालय ने रीयल एस्टेट फर्म जेपी एसोसिएट्स को 27 अक्टूबर तक न्यायालय की रजिस्ट्री में दो हजार करोड रुपए जमा कराने का आज निर्देश दिया। न्यायालय ने इसके साथ ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल द्वारा अंतरिम समाधान की व्यवस्था के रुप में नियुक्त पेशेवर (आईआरपी) को इसका प्रबंधन अपने हाथ में लेने और खरीददारों तथा कर्जदाताओं के हितों के संरक्षण की योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया।
दिवालिया घोषित करने की कार्रवाही रहेगी जारी
शीर्ष अदालत ने एक तरह से जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दे दी है परंतु उपभोक्ता आयोग जैसे दूसरे मंचों पर इसके खिलाफ शुरु की गयी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने जेपी एसोसिएट्स की सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के प्रबंध निदेशक और निदेशकों को शीर्ष अदालत की अनुमति के बगैर देश से बाहर जाने से रोक दिया है।
45 दिन के अंदर पेश हो समाधान योजना
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने आईआरपी से कहा है कि वह 45 दिन के भीतर समाधान योजना न्यायालय में पेश करे जिसमे फ्लैट खरीददारों और कर्जदाताओं के हितों के संरक्षण के बारे में संकेत दिये गये हैं। हालांकि, न्यायालय ने जेपी एसोसिएट्स को आईआरपी की स्वीकृति से अपनी जमीन और दूसरी संपत्ति बेच कर दो हजार करोड रुपए की व्यवस्था करने की अनुमति दे दी है।
4 सितम्बर को लगी थी रोक
शीर्ष अदालत ने चार सितंबर को इस कंपनी को दिवालिया घोषित करने के लिये नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से अनुरोध किया था कि दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई के खिलाफ और फ्लैट खरीददारों के हितों की रक्षा के लिये दायर याचिकाओं पर फैसला लेने में सहयोग करें ।
दिवालिया संहिता 2016 के अंतर्गत् फ्लैट खरीददार बैंकों की तरह सुरक्षित देनदारों की श्रेणी में नहीं आते हैं और इसलिए यदि सुरक्षित देनदारों को भुगतान करने के बाद कुछ शेष रहता है तो वहीं फ्लैट खरीददारों को मिल सकता है।
जेपी इंफ्राटेक में 32,000 व्यक्तियों ने फ्लैट बुक कराए हैं
याचिकाकर्ता चित्रा शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने आरोप लगाया था कि फ्लैट खरीददारों तथा दूसरों के करीब 25,000 करोड़ रुपए इसमें फंसे हुये हैं लेकिन महज 500 करोड़ रुपए की वसूली के लिये कंपनी को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरु की गयी है। जेपी इंफ्राटेक की विभिन्न परियोजनाओं में करीब 32,000 व्यक्तियों ने फ्लैट बुक कराये हैं।
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