चीन को टाटा करने वाली हैं 1000 कंपनियां, 300 ने भारत से आने का रास्ता पूछा

लॉकडाउन का दूसरा फेज शुरू हो गया, जो कि 3 मई तक चलेगा। कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हो रहा है।

नई द‍िल्‍ली: लॉकडाउन का दूसरा फेज शुरू हो गया, जो कि 3 मई तक चलेगा। कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन लगने के कारण शहर भर की कंपनियां, फैक्ट्री, इंडस्ट्री, ऑफिस, बाजार, मॉल्स सब बंद है। ऐसे में जरूरी सेवाओं को छोड़कर देश को पूरी तरह से लॉक किया गया है। इसका असर अब देश की इकोनॉमी पर पड़ रहा है। कई कंपनियों को अच्‍छा खासा नुकसान हो रहा है। मिली जानकारी के मुताब‍िक करीब 1000 विदेशी कंपनियां ऐसी हैं जिनकी नजरें भारत में उत्‍पादन शुरू करने पर जुड़ी हुई है। जो कंपनियां इस समय चीन में है उनके बीच 'एग्जिट चाइना' मंत्र यानी चीन से निकलने की सोच मजबूत होती जा रही है। ऐसे में अगर यह बात सच हुई तो फिर निश्चित तौर पर भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए यह निश्चित तौर पर एक अच्‍छी खबर होगी।

1000 कंपनियों की नजरें भारत पर

1000 कंपनियों की नजरें भारत पर

करीब 1000 विदेशी कंपनियां जहां भारत में उत्‍पादन शुरू करने पर नजरें गड़ा रही हैं तो 300 कंपनियां ऐसी हैं जिन्‍होंने सक्रियता से चीन से निकलने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। ये कंपनियां भारत को एक वैकल्पिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब के तौर पर देखने लगी हैं। कंपनियों ने सरकार के अलग-अलग स्‍तर पर अपनी तरफ से प्रस्‍ताव भेजने शुरू भी कर दिए हैं। कंपनियों की तरफ से केंद्र सरकार के विभागों के अलावा विदेशों में भारतीय उच्‍चायोगों और राज्‍य के औद्योगिक विभागों के पास प्रपोजल भेजे गए हैं। कोरोना वायरस संकट की वजह से चीन पसंदीदा मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब होने का अपना तमगा खोने की तरफ बढ़ रहा है। हजारों विदेशी कंपनियों की तरफ से भारत में अथॉरिटीज के साथ अलग-अलग स्‍तर पर वार्ता जारी है। जो कंपनियां भारत आने को उत्‍सुक हैं उनमें मोबाइल्‍स, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मेडिकल डिवाइसेज, टे‍क्‍सटाइल्‍स और सिंथेटिक फैब्रिक से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।

चीन अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की नजरों में

चीन अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की नजरों में

वहीं नए मैन्‍यूफैक्‍रर्स को यह टैक्स बस 17 % ही अदा करना होगा और यह साउथ ईस्‍ट एशिया में सबसे कम है। चीन इस समय अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की नजरों में है। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन उस पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने इस महामारी को समय रहते नियंत्रित नहीं किया है। कई देश अपने कॉरपोरेट सेक्‍टर को चीन से यूनिट्स बाहर करने के लिए कह सकती हैं। जापान ने तो अपने यहां के उत्‍पादकों से साफ कर दिया है कि वो चीन से अलग किसी और देश में अब मैन्‍यूफैक्‍चरिंग के विकल्‍प तलाशें।

सरकार ने कॉरपोरेट टैक्‍स को द‍िया 25.17 प्रतिशत कर

सरकार ने कॉरपोरेट टैक्‍स को द‍िया 25.17 प्रतिशत कर

वहीं इस बात की भी उम्‍मीद की जा रही है कि एक बार जब कोरोना वायरस से बिगड़ी स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी तो फिर कंपनियों के साथ वार्ता निर्णायक दौर में पहुंचेगी और भारत एक वैकल्पिक जगह के तौर पर सामने आएगा। जापान, अमेरिका और साउथ कोरिया की कंपनियां जो चीन पर निर्भर हैं, अब काफी डरी हुई हैं और भारत आना चाहती हैं। पिछले वर्ष सितंबर में केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट टैक्‍स को 25.17 % कर दिया था। यह कदम घरेलू उत्‍पादकों को फायदा पहुंचाने वाला था।

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