मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य की जनता के भरोसे पर खरे उतरते हुए एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नई सरकार के बने एक महीने भी नहीं हुए हैं और इसने राज्य में खुले में मांस और मछली बेच रहे 25,000 दुकानें हटवा दी हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत राज्य में खुले में मांस और मछली बेचना प्रतिबंधित है और मोहन सरकार ने सिर्फ 25 दिनों में ऐसी करीब 25 हजार दुकानें हटवाई हैं, जो इस कानून का उल्लंघन करके चलाई जा रही थीं।

सरकार बनते ही सीएम मोहन यादव ने दिए थे निर्देश
पिछले साल 13 दिसंबर को शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री ने ऐसी दुकानें बंद करवाने के निर्देश दिए थे, जो सारे नियमों को ताक पर रखकर खुले में मांस और मछली बेच रहे थे।

खुले में मांस और मछली बेचने वालों को पहले ही दी गई थी सलाह
दरअसल, एमपी में कई शहरों में खुले में मांस और मछली बेचने वाले दुकानदारों को यह भी सलाह दी गई थी कि वे इसके लिए ग्लास केस, पर्दे या जाल का इस्तेमाल करें, ताकि यह सुरक्षित भी रहे और इसकी वजह से गंदगी भी न फैले।
लेकिन, जो दुकान वाले ऐसा करने में नाकाम रहे, उन्हें आखिरकार कानून के पालन के लिए बाध्य होना पड़ा है। तथ्य यह है कि राज्य के कई शहरों में लोगों ने फुटपाथ पर ही मांस की दुकानें खोल रखी थीं और उसे गैर-कानूनी तौर पर चला रहे थे।

लेकिन, मध्य प्रदेश सरकार ने तय किया है कि न तो ऐसी गैर-कानूनी दुकानें चलने दी जाएंगी और न ही इन्हें खुले में बेचने की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी सरकार के इस कदम के बारे में रविवार को बताया है,'मैंने निर्देश दिए थे कि खुले में मांस और मछली बेचने वाली दुकानें हटायी जानी चाहिए। आज खुले में मांस और मछली बेचने वाली करीब 25,000 दुकाने राज्य में हटवाई जा चुकी हैं।'

विकास के मार्ग की बाधाओं को दूर करके प्रगति करना चाहता है मध्य प्रदेश
सच्चाई ये है कि मध्य प्रदेश सरकार लगातार राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटी हुई है। विकास की राह में बाधा बनने वाली तमाम दिक्कतों को वह दूर करना चाहती है और इससे समझौता करने के लिए कतई तैयार नहीं है।

समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग मांसाहारी भोजन से परहेज करता है। ऐसे में एक कल्याणकारी सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसी चीजों की खरीद-बिक्री के लिए एक उचित तरह की व्यवस्था को प्रोत्साहन दे।
ऐसा करने से इन चीजों का जो सेवन करते हैं, उन्हें भी सुरक्षित आहार मिलेगा और जो इससे दूर रहना चाहते हैं, उन्हें भी उनके लिए अप्रिय दृश्य देखने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

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