दिल्ली में कोऑपरेटिव सोसायटी (RCS) ने अवैध रूप से एंट्री फीस को लेकर सख्त नियम लागू किया है। नए रूल्स के मुताबिक सोसायटीज अब कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी किसी भी रूप में किसी भी सदस्य से मनमानी एट्री फीस नहीं ले पाएंगी। इसको लेकर आरसीएस ने इसे लेकर निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश दिल्ली की सभी ग्रुप हाउसिंग, हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटियों के प्रेजिडेंट और सेकेटरी के अलावा स्पेशल रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार और सभी असिस्टेंट रजिस्ट्रार को भेज दिए गए हैं।
दिल्ली की कुछ सोसायटियों में सदस्यों या किरायेदारों से एंट्री फीस चार्ज करने की शियाकतें आ रही थीं। ये शुल्क सोसायटी में सुविधायों पर खर्च करने के लिए लगाया था। इस शुल्क का जिस पर खर्च होता उनमें डेवेलपमेंट फंड, ट्रांसफर फीस, कॉमन गुड फंड शामिल है। अधिकतर शिकायतें मैंबरशिप के लिए अप्लाई करने वालों और पावर ऑफ अटार्नी के लिए अप्लाई करने वालों से मिलीं।

वहीं नियमानुसार, सोसायटीज में सदस्य से एंट्री फीस लेना डीसीएस एक्ट, 2003 और डीसीएस रूल, 2008 का उल्लंघन है। ऐसे में अवैध तरह लिए जा रही एंट्री फीस को लेकर सोसायटीज के चेताया भी गया था। ऐसे वसूली करने वाली सोसायटी प्रमुखों से कहा गया कि वो इस तरह की प्रैक्टिस तुरंत बंद कर दें। वरना इस तरह की मैनेजिंग कमिटी के खिलाफ नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं ऑल द्वारका रेजिडेंट फेडरेशन के प्रेजिडेंट अजीत स्वामी ने बताया कि इस तरह की शिकायतें मिलती रहती हैं। वह अपनी तरफ से भी सोसायटियों को आगाह करते रहे हैं। आरसीएस के निर्देश सभी सोसायटियों को मिल चुके हैं। वह खुद भी सोसायटियों को इसकी कॉपी दे चुके हैं। सोसायटियों को नए सदस्यों या किरायेदारों से एंट्री फीस लेने का अधिकार ही नहीं है।
बता दें कि जनवरी में आरसीएस ने इसे लेकर निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश दिल्ली की सभी ग्रुप हाउसिंग, हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटियों के प्रेजिडेंट और सेकेटरी के अलावा स्पेशल रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार और सभी असिस्टेंट रजिस्ट्रार को भेजे गए हैं। यह आदेश रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी के एके सिंह ने जारी किए हैं।
वहीं हाउसिंग सोसायटियों की मैनेजिंग कमिटियों को पहले भी यह निर्देश दिए गए कि वो किसी भी तरह की एंट्री फीस नहीं ले सकते। इस संबंध में पहला निर्देश अक्टूबर 1999 में जारी हुआ था। इसके बाद अक्टूबर 2001 में भी यह निर्देश दिया गया।
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