भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज अपनी पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। अगर आप निवेश की शुरुआत कर रहे हैं, तो इस फैसले का सीधा असर आपके SIP, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और EMI पर पड़ेगा। ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने के कारण, अगले 30 दिनों के लिए आपको अपनी मनी प्लानिंग थोड़ी स्मार्ट तरीके से करनी होगी। आइए जानते हैं कि इस वक्त आपके लिए क्या जरूरी है और आपको सबसे पहले क्या कदम उठाने चाहिए।
3 से 5 जून तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में फिलहाल 'न्यूट्रल' रुख अपनाने का फैसला लिया गया है। बाजार को पहले से ही इसकी उम्मीद थी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों और मौसम की अनिश्चितता की वजह से महंगाई का खतरा बना हुआ है। बचत करने वालों और कर्ज लेने वालों के लिए इसका मतलब यह है कि रेट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स फिलहाल स्थिर रहेंगे।

RBI के फैसले के बाद SIP और लम्पसम निवेश की स्ट्रैटेजी
अपनी SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) को बिना रुके चलने दें; अक्सर पॉलिसी के हिसाब से मार्केट को 'टाइम' करने की कोशिश में मुनाफा कम हो जाता है। अगर आपके पास एकमुश्त पैसा (Cash) रखा है, तो उसे 1 से 6 महीने के सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करें। इसके लिए आप इक्विटी फंड्स के साथ शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड या ट्रेजरी बिल का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर हालिया तेजी के बाद आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा तय लक्ष्य से ज्यादा हो गया है, तो उसे रीबैलेंस जरूर करें।
FD लैडरिंग और ब्याज दरों को लेकर क्या हो रणनीति
नई FD कराते समय 'लैडरिंग' (Laddering) तकनीक अपनाएं। यानी अपना पैसा 1, 3 और 5 साल की अलग-अलग अवधि में बांटकर लगाएं। इससे आपको आज की बेहतर ब्याज दरों का फायदा भी मिलेगा और भविष्य में रेट कट होने पर लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) भी बनी रहेगी। हमेशा भरोसेमंद और रेगुलेटेड बैंकों को ही चुनें और जोखिम कम करने के लिए अलग-अलग बैंकों में डिपॉजिट रखें। स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ऑफर्स देख सकते हैं, लेकिन सिर्फ ज्यादा ब्याज के पीछे न भागें। नीचे देखें कि 1 लाख रुपये के निवेश पर 7% FD और 12% इक्विटी रिटर्न में कितना अंतर आता है:
| अवधि | FD 7% सालाना (₹1,00,000 निवेश) | इक्विटी 12% सालाना (अनुमानित) | अंतर |
|---|---|---|---|
| 5 साल | ₹1,40,255 | ₹1,76,234 | ₹35,979 |
| 10 साल | ₹1,96,715 | ₹3,10,585 | ₹1,13,870 |
| 15 साल | ₹2,75,911 | ₹5,47,395 | ₹2,71,484 |
होम लोन EMI: RBI के फैसले के बाद प्री-पेमेंट करें या निवेश?
अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो बैंक से कहें कि वे तिमाही रीसेट का फायदा तुरंत पास करें। अगर आपकी ब्याज दर 9 प्रतिशत से ज्यादा है, तो नया निवेश करने से पहले सरप्लस पैसे से लोन का कुछ हिस्सा चुकाने (Part-prepayment) की सोचें। लोन के शुरुआती 5 सालों में प्री-पेमेंट करने से ब्याज का बोझ सबसे ज्यादा कम होता है। अगर आपका स्प्रेड (Spread) एक्सटर्नल बेंचमार्क से 250 बेसिस पॉइंट से ज्यादा है, तो रिफाइनेंसिंग पर विचार करें।
बचत करने वालों और कर्जदारों के लिए 30 दिनों का एक्शन चेकलिस्ट
अगले 30 दिनों के भीतर अपनी SIP को ऑटोमेट करें और खाली पड़े कैश के लिए 3 महीने का ट्रांसफर प्लान बनाएं। FD लैडरिंग या लिक्विड फंड्स के जरिए कम से कम एक साल का इमरजेंसी फंड तैयार करें। अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें, बैंक से होम लोन रेट का लेटर मांगें और अगर बचत ज्यादा हो रही हो तो लोन स्विच करने में देरी न करें। रेट रीसेट की तारीखों का रिमाइंडर लगाएं और बैंकों की ब्याज दरों में होने वाले बदलावों पर हर हफ्ते नजर रखें।


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