नई दिल्ली, दिसंबर 26। बीते कुछ समय में शेयर बाजार में आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) में पैसा लगाने को लेकर निवेशकों की काफी दिलचस्पी बढ़ी है। असल में सीधी सी बात है, निवेशकों को चाहे जैसे जल्दी प्रोफिट मिले वो उसी तरफ आकर्षित होते हैं। कुछ कंपनियों ने लिस्टिंग के साथ के निवेशकों का पैसा 2-3 गुना कर दिया, इसलिए लोगों का ध्यान आईपीओ की तरफ और भी अधिक जाने लगा। मगर क्या हर कंपनी के आईपीओ में पैसा लगाना सही है? हम यहां इसी सवाल का जवाब जानेंगे।
घाटे में चल रही कंपनियां आ रहीं
पारंपरिक कंपनियों के उलट, जो पब्लिक के निवेश को आकर्षित करने के लिए अपने मुनाफे पर निर्भर रहती हैं, नए जमाने की ज्यादातर कंपनियां घाटे में चल रही हैं। ये कंपनियां अवसरवादी उद्यम पूंजीपतियों (वेंचर कैपिटलिस्टों) द्वारा किए गए निवेश पर बने मूल्यांकन पर निर्भर होती हैं। ऐसे उद्यम पूंजीपति घाटे में चल रही कंपनियों में भी पैसा लगाना जारी रखते हैं ताकि यह धारणा बनाई जा सके कि ऐसी कंपनियां बहुत अधिक वैल्यू वाली हैं और भारी निवेश आकर्षित करने की अच्छी संभावनाएं हैं।
क्यों करते हैं वे निवेश
उद्यम पूंजीपति क्यों घाटे में चल रही कंपनी में निवेश करते हैं, इसके पीछे एक बड़ा कारण है, जो उद्यम पूंजीपतियों को ही फायदा पहुंचाता है। शेयर बाजार में तेजी के दौरान, जब ज्यादातर नये निवेशक इक्विटी में निवेश करने के लिए नए अवसरों की तलाश करते हैं, तो ऐसे उद्यम पूंजीपति घाटे को अच्छा लाभ कमाने के लिए हाई प्राइस पर हिस्सेदारी बेचने की पेशकश करके आईपीओ लाते हैं। इससे उन्हें हुआ घाटा नये निवेशकों को पहुंच जाता है, क्योंकि वे महंगी कीमत पर शेयर खरीदते हैं।
प्रीमियम वैल्यू से होता है नुकसान
लाभ कमाने वाली कंपनियों के लाभ का हिस्सा पाने के लिए निवेश करने के बजाय, निवेशक घाटे में चल रही कंपनियों की देनदारियों को एक प्रीमियम प्राइस पर खरीद लेते हैं, जिसे उन्हें सामान्य रूप से डिस्काउंट प्राइस पर हासिल करना चाहिए था। ज्यादातर कंपनियों में उद्यम पूंजीपतियों का हिस्सा इस प्रोसेस में निवेशकों को ट्रांसफर हो जाता है। इसलिए आपको आईपीओ में निवेश से पहले सावधान रहने की जरूरत है।
क्या करें निवेशक
कुछ आईपीओ, स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के समय हाई प्राइस पर खुले और इससे निवेशकों को उनके शेयरों से लाभ कमाने का मौका मिला। मगर संभावना यह भी है कि आप उसी प्रोसेस का हिस्सा बन कर घाटा उठा लें जो ऊपर बताई गयी है। इसलिए जानकार कहते हैं कि आईपीओ रूट के माध्यम से भी हाई मार्केट साइकिल (जब मार्केट में तेजी का दौर हो) के दौरान शेयरों में निवेश से बचना बेहतर है, जो मौजूदा कंपनियों के शेयरों में निवेश करने से अधिक जोखिम भरा है।
कैसे करें निवेश
अब सवाल यह है कि कोई कैसे निवेश करे कि उसे फायदा हो। आपको बेसिक चीजों को फॉलो करना चाहिए और इक्विटी में एकमुश्त निवेश करने के बजाय रेगुलर समय-समय पर निवेश करना चाहिए। इसलिए, यदि आप एसआईपी के माध्यम से इक्विटी म्यूचुअल फंड (एमएफ) में निवेश कर रहे हैं, तो आईपीओ के शोर से परेशान न हों और अपने एसआईपी को जारी रखें। एमएफ निवेश पेशेवर फंड मैनेजरों द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं, तो वे बेहतर जानते हैं कि कौन सा आईपीओ निवेश के योग्य है और कौन सा नहीं।
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