Plastic Notes: कागज नहीं, अब प्लास्टिक के नोट चलाएगा RBI! क्या बदल जाएगी भारत की नोटों वाली तस्वीर?

Plastic Notes: भारत का केंद्रीय बैंक, बढ़ती मांग के बीच कागजी नोटों की छपाई पर बढ़ रहे खर्च को कम करने के उपाय के तौर पर, पॉलीमर (प्लास्टिक) के नोट लाने पर विचार कर रहा है। 'बिजनेस स्टैंडर्ड' की एक रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने पटना और मुंबई में हुई अपनी पिछली दो बोर्ड बैठकों के दौरान पॉलीमर या प्लास्टिक के नोट लाने के प्रस्ताव पर चर्चा की है।

Plastic Notes

प्लास्टिक के नोट क्या होते हैं?

प्लास्टिक के नोट, जिन्हें आधिकारिक तौर पर पॉलीमर नोट कहा जाता है। करेंसी नोट होते हैं जो पारंपरिक नोटों में इस्तेमाल होने वाले कॉटन-आधारित कागज के बजाय, पॉलीमर नामक एक पतले, लचीले प्लास्टिक पदार्थ से बने होते हैं। "प्लास्टिक" नोट कहे जाने के बावजूद, ये क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कड़े नहीं होते हैं। पॉलीमर नोट हल्के और लचीले होते हैं, और इन्हें पारंपरिक कागजी करेंसी की तरह ही मोड़ा और यूज किया जा सकता है।

मुख्य अंतर इनकी मजबूती है। पॉलीमर नोट आम तौर पर कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा समय तक चलते हैं, क्योंकि ये गंदगी, नमी और फटने के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं। इससे खराब हुए नोटों की संख्या कम हो जाती है, जिन्हें अब यूज नहीं किया जा सकता और जिन्हें बदलने की जरूरत पड़ती है।

इसके अलावा, पॉलीमर नोटों को इस तरह से डिज़ाइन किया जा सकता है कि उनकी नकल करना बेहद मुश्किल हो, क्योंकि उनमें एडवांस, इन-बिल्ट सुरक्षा विशेषताएं-जैसे कि पारदर्शी, माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही-इस्तेमाल की जा सकती हैं। पॉलीमर नोट ज्यादा समय तक चलन में रहते हैं, इसलिए केंद्रीय बैंक अक्सर समय के साथ खराब हो चुके नोटों को बदलने पर कम खर्च करते हैं।

RBI अब इन पर विचार क्यों कर रहा है?

पॉलिमर बैंकनोट्स में RBI की नई दिलचस्पी हाल के सालों में करेंसी की मांग में आई तेजी के बीच सामने आई है। RBI की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, करेंसी नोट छापने पर होने वाला खर्च पिछले साल के 5,101.4 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, जिसकी मुख्य वजह बैंकनोट्स की बढ़ती मांग थी।

इसके साथ ही, चलन से हटाए जा रहे खराब नोटों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। अकेले FY25 में ही, करीब 23.8 अरब खराब बैंकनोट्स को नष्ट किया गया, जिसमें 500 रुपये और 100 रुपये के नोटों का बड़ा हिस्सा था। RBI 10 रुपये और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की लगातार मांग भी देख रहा है, जो आमतौर पर बार-बार चलन में रहने के कारण जल्दी खराब हो जाते हैं।

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