भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज, 17 जून को ट्रेजरी बिल (T-bill) की नीलामी कर रहा है। आम निवेशक अब 91-दिन, 182-दिन या 364-दिन की अवधि के लिए अपनी बोली लगा सकते हैं। आप RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के जरिए सिर्फ 10,000 रुपये से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म आपके पास मौजूद अतिरिक्त कैश को सरकारी सुरक्षा के साथ निवेश करने का एक सुरक्षित मौका देता है। आज की औसत यील्ड (रिटर्न) पाने के लिए 'नॉन-कंपीटिटिव बिडिंग' का इस्तेमाल करें।
निवेश के लिए सबसे पहले अपने अकाउंट में लॉग इन करें और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Sec) मार्केट सेगमेंट को चुनें। नीलामी में सुरक्षित रूप से शामिल होने के लिए तय कट-ऑफ समय से पहले अपनी बोली लगाना न भूलें। पेमेंट के लिए आप UPI या नेटबैंकिंग का आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। नीलामी के नतीजे फाइनल होते ही पैसे आपके बैंक खाते से कट जाएंगे। इस आसान प्रक्रिया की वजह से आपको महंगे ब्रोकरों या बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

91/182/364-दिन के T-bill ऑक्शन के लिए खास गाइड
सही अवधि का चुनाव आपकी नकदी की जरूरत और फाइनेंशियल गोल्स पर निर्भर करता है। जिन्हें जल्दी पैसों की जरूरत पड़ सकती है, उनके लिए 91-दिन वाला बिल सबसे अच्छा है। वहीं, 364-दिन वाला विकल्प लंबे समय के लिए पैसा पार्क करने पर थोड़ा ज्यादा रिटर्न देता है। कई समझदार निवेशक इन बिलों का इस्तेमाल सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के विकल्प के तौर पर भी करते हैं। अलग-अलग अवधि के बिलों में निवेश (लैडरिंग) करने से आपको एक निश्चित अंतराल पर फंड मिलता रहता है।
| अवधि का चुनाव | सबसे बेहतर इस्तेमाल | लिक्विडिटी का स्तर |
|---|---|---|
| 91-दिन का बिल | इमरजेंसी फंड | बहुत ज्यादा |
| 182-दिन का बिल | शॉर्ट-टर्म गोल्स | ज्यादा |
| 364-दिन का बिल | निवेश पार्किंग | मध्यम |
RBI रिटेल डायरेक्ट के जरिए सेटलमेंट और टैक्स के नियम
ट्रेजरी बिल (T-bills) में बैंक एफडी या बॉन्ड की तरह समय-समय पर ब्याज नहीं मिलता है। इसके बजाय, निवेशक इन्हें डिस्काउंट पर खरीदते हैं और मैच्योरिटी पर पूरी फेस वैल्यू वापस पाते हैं। खरीद की कीमत और मैच्योरिटी वैल्यू के बीच का अंतर ही आपकी कमाई मानी जाती है, जिस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसका सेटलमेंट T+1 टाइमलाइन पर होता है, यानी एक वर्किंग डे के भीतर क्रेडिट मिल जाता है। बोली लगाते समय बैंक बैलेंस जरूर चेक कर लें ताकि पेमेंट फेल होने जैसी दिक्कत न आए। अपनी पारदर्शिता के कारण शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए ट्रेजरी बिल एक बेहतरीन विकल्प हैं।


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