RBI MPC बैठक शुरू: क्या आपकी EMI बढ़ेगी? जानें रेपो रेट और निवेश का पूरा गणित

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज, 3 जून से शुरू हो गई है, जिसका फैसला 5 जून को सुनाया जाएगा। फिलहाल रेपो रेट फरवरी से 5.25 प्रतिशत पर स्थिर है और जानकारों का मानना है कि इस बार भी इसमें बदलाव की उम्मीद कम है। इस फैसले का सीधा असर आपके होम लोन की EMI, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की नई दरों और बचत से जुड़े आपके निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।

आपकी EMI तभी बदलती है जब आपके लोन का 'रीसेट पीरियड' आता है। रेपो-लिंक्ड लोन कम से कम हर तीन महीने में रीसेट होते हैं, जबकि कई MCLR लोन 6 या 12 महीने में रीसेट किए जाते हैं। ऐसे में 5 जून को अगर रेट नहीं भी बदलते हैं, तो भी आपकी रीसेट डेट के आधार पर आपकी EMI जल्द ही बदल सकती है। गणित समझें तो 30 लाख रुपये के 20 साल वाले होम लोन पर 0.25% (25 bps) के बदलाव से हर महीने करीब ₹490 का अंतर आता है।

RBI Repo Rate Decision 2026: How It Impacts Your Home Loan EMI, FD Rates, and Investment Strategy

रेपो रेट का फैसला: EMI, रीसेट साइकिल और कैलकुलेशन का पूरा गणित

अगर आप ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं, तो 3 से 15 महीने की अवधि वाली 'FD लैडरिंग' (टुकड़ों में निवेश) का रास्ता चुनें। इससे आप आज की दरों को लॉक कर पाएंगे और भविष्य में रेट कट होने पर भी आपके पास निवेश के बेहतर विकल्प रहेंगे। 1 से 3 साल के लक्ष्यों के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन डेट फंड में निवेश किया जा सकता है, वहीं अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए अल्ट्रा-शॉर्ट और लो ड्यूरेशन फंड्स का चुनाव करना बेहतर होगा।

PPF, SSY, SCSS के लिए स्ट्रैटेजी और लिक्विड फंड्स से जुड़े संकेत

अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरें फिलहाल स्थिर हैं: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर 7.1 प्रतिशत, सुकन्या समृद्धि (SSY) पर 8.2 प्रतिशत और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) पर 8.2 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है। जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए अगली समीक्षा जून के अंत में होनी है। SSY और SCSS की निवेश सीमा का फायदा तिमाही की शुरुआत में ही उठा लें, जबकि PPF में निवेश जारी रखें।

हाल ही में ट्रेजरी बिल (T-bill) की नीलामी 5.5 से 5.7 प्रतिशत के करीब रही है, जो लिक्विड फंड्स के रिटर्न का एक साफ संकेत है। 5 जून के फैसले से पहले अपने लोन का बेंचमार्क और रीसेट डेट जरूर चेक कर लें। लोन की अवधि कम करने के लिए छोटे पार्ट-पेमेंट की योजना बनाएं, अपनी FD लैडरिंग को एडजस्ट करें और स्पष्टता आने तक फालतू कैश को लिक्विड फंड्स या शॉर्ट टर्म T-bills में पार्क करें।

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