Fixed Deposit: कभी-कभी ऐसा समय आता है कि हमें पैसों की तत्काल जरूरत पड़ जाती है। ऐसे में लोग या तो अपनी सेविंग्स से पैसे निकालते हैं, या फिर किसी से उधार ले लेते हैं। क्योंकि पैसों की तत्काल जरूरत होती है। ऐसे में अगर आपके पास फिक्स डिपॉजिट स्कीम का अकाउंट है, तो कई बार आप उसे मैच्योरिटी से पहले तोड़ सकते हैं और आपको ज्यादा नुकसान नहीं होता है।
ऐसा खास तौर पर उन फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में सही होता है, जिनमें पैसा डालने और समय से पहले निकलने के लिए भी कुछ प्रावधान हो। लेकिन कई बार फिक्स्ड डिपाजिट तुड़वाना भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, इसीलिए आपको कोई भी निर्णय बिना सोचे समझे नहीं लेना चाहिए।

ऐसा इसलिए है क्योंकि अलग-अलग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पर अलग-अलग ब्याज दर ऑफर करते हैं। उदाहरण के लिए कोई बैंक 2 से 3 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम पर 7 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है, बाकी सारे फायदे जोड़कर मान लीजिए कि इसमें आपको 7.21 प्रतिशत तक का रिटर्न मिलता है। वहीं बुजुर्गों के लिए यह रिटर्न थोड़ा और ज्यादा होता है और सालाना रिटर्न 7.71 फीसदी तक का हो सकता है।
ऐसे में अगर आप अपने पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, तो आपको उसे पर ब्याज भी देना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्सनल लोन पर लगने वाला ब्याज आपके सिबिल स्कोर पर भी निर्भर करता है। अगर आपने शुरू से बेहतर सिबिल स्कोर मेंटेन किया है तो आपको सस्ते इंटरेस्ट रेट पर लोन मिल जाता है और अगर आपने समय पर पेमेंट नहीं किया है और सिबिल स्कोर गड़बड़ है तो आपको इस लोन पर ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की पर्सनल लोन पर कई बैंक 10.5 प्रतिशत से लेकर 21 प्रतिशत के एनुअल रेट पर इंटरेस्ट चार्ज करते हैं। इसके अलावा करीब 2.5 फीसदी तक की प्रोसेसिंग फीस भी बैंक के द्वारा पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहक से ली जाती है। इसी तरह कुछ बैंक 11.5 फ़ीसदी से लेकर 14 फीसदी तक की एनुअल इंटरेस्ट रेट पर लोन देते हैं और 1.5 प्रतिशत तक की प्रोसेसिंग फीस चार्ज करते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की ऐसी स्थिति में जहां पर हमें ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, लेकिन एफडी पर कम ब्याज मिल रहा है। ऐसी कंडीशन में हम सभी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाना सही समझते हैं। ऐसे में या तो आपको एक साथ सारे पैसों की एफडी नहीं करनी चाहिए, अलग-अलग स्कीम में लगाना चाहिए ताकि अगर एक एफडी तोड़ दे तो बाकी का इंटरेस्ट मिलता रहे। पर मान लीजिए अपने 3 साल के लिए 500000 रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम चुनी है और आप इस समय से पहले तुड़वा रहे हैं, तो आपको इंटरेस्ट पर एक प्रतिशत की पेनल्टी लगती है। इससे एक साल में आपका रिटर्न सीधे 7 से 6 प्रतिशत का हो जाता है। इसके साथ ही टेन्योर पूरा होने के बाद मिलने वाला फायदा भी खत्म हो जाता है।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर करा लें लोन
अब जैसे आपने लख रुपए जमा किए हैं और आपको 300000 रुपयों की जरूरत है, तो ऐसे में आप या तो बैंक से पर्सनल लोन ले सकते हैं या इस फिक्स डिपॉजिट स्कीम पर भी लोन ले सकते हैं। एफडी स्कीम पर लोन बड़ी आसानी से मिल जाता है। इस तरह आप 5 लाख की एफडी में से 3 लाख निकाल लेते हैं, लेकिन आपको फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। आमतौर पर आपके द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा की गई राशि के 90 से 95 प्रतिशत तक का लोन बैंकों के द्वारा दे दिया जाता है। फिक्स डिपॉजिट स्कीम पर लगने वाला ब्याज पर्सनल लोन के मुकाबले कम होता है।
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