EPS Pension Scheme: क्या आपको लगता है कि प्राइवेट नौकरी करने वालों को रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन नहीं मिलती? अगर हाँ, तो यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। असल में लाखों कर्मचारियों के PF के साथ हर महीने एक ऐसी स्कीम में भी पैसा जाता है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता। यही स्कीम रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन दिला सकती है। इसका नाम है Employees' Pension Scheme (EPS-95)। लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी नियम और शर्तें हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

आखिर EPS क्या है?
जब आप किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं और आपका PF कटता है, तो सिर्फ EPF (Provident Fund) ही नहीं बनता, बल्कि आपके लिए EPS यानी Employees' Pension Scheme भी चलती है।
सरल शब्दों में समझें तो...
EPF आपके रिटायरमेंट के लिए एकमुश्त रकम जमा करता है।
EPS रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन देने का काम करती है।
यानी एक स्कीम आपको लंपसम पैसा देती है,
जबकि दूसरी हर महीने नियमित आय का सहारा बनती है।
EPS में पैसा कहां से आता है? यही वह बात है जो सबसे ज्यादा लोग नहीं जानते। हर महीने...कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी + DA का 12% EPF में जमा करता है। कंपनी भी 12% योगदान देती है। लेकिन कंपनी का पूरा 12% आपके PF खाते में नहीं जाता।
उसमें से...
8.33% EPS (पेंशन स्कीम) में चला जाता है।
बाकी हिस्सा EPF में जमा होता है।
क्या हर प्राइवेट कर्मचारी को पेंशन मिलेगी? नहीं। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। आपको...
EPF सदस्य होना चाहिए।
कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service) पूरी करनी होगी।
सामान्य तौर पर 58 साल की उम्र पूरी होने पर पेंशन मिलनी शुरू होती है।
अगर 10 साल पूरे नहीं हुए तो? मान लीजिए आपने किसी कंपनी में 6 या 8 साल नौकरी की और फिर नौकरी छोड़ दी।
ऐसी स्थिति में सामान्य मासिक पेंशन का अधिकार नहीं बनता। हालांकि आपकी सेवा अवधि और नियमों के अनुसार अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं, जैसे Scheme Certificate लेना या कुछ मामलों में EPS राशि निकालना। इसलिए नौकरी छोड़ते समय जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपने EPS रिकॉर्ड की जांच जरूर करें।
नौकरी बदलने से क्या पेंशन पर असर पड़ता है? यह भी एक बड़ा सवाल है। अगर आपने कई कंपनियों में नौकरी की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यदि आपका EPF/EPS रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर होता रहा है, तो अलग-अलग कंपनियों में की गई पात्र सेवा जोड़कर 10 साल की शर्त पूरी की जा सकती है।
रिटायरमेंट से पहले भी पेंशन ली जा सकती है? जी हां। अगर आपकी उम्र 50 साल हो चुकी है, तो कुछ शर्तों के साथ Early Pension ली जा सकती है। लेकिन ध्यान रखें... जितनी जल्दी पेंशन शुरू करेंगे, उतनी ही कम मासिक पेंशन मिलेगी क्योंकि उस पर कटौती लागू होती है। पेंशन की राशि कैसे तय होती है?
EPS में हर किसी को एक जैसी पेंशन नहीं मिलती।
यह दो बातों पर निर्भर करती है-
आपकी Pensionable Salary
आपने कितने साल नौकरी की (Pensionable Service)
इसके लिए एक तय फॉर्मूला है...मासिक पेंशन = Pensionable Salary × Pensionable Service ÷ 70 , जितने वर्षों तक पात्र सेवा रहेगी, उतनी बेहतर पेंशन मिलने की संभावना होगी। सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, परिवार को भी मिलता है फायदा अगर EPS सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में...पति या पत्नी को Family Pension, बच्चों को Pension, स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में Disability Pension जैसे लाभ भी मिल सकते हैं। यही वजह है कि EPS को केवल रिटायरमेंट स्कीम नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की योजना भी माना जाता है।
क्या EPS में ब्याज मिलता है?
इस सवाल पर कई लोग भ्रमित रहते हैं। जवाब है-नहीं। EPF खाते की तरह EPS में जमा राशि पर अलग से ब्याज नहीं मिलता। यह एक Defined Benefit Scheme है, यानी इसमें भविष्य की मासिक पेंशन तय नियमों और फॉर्मूले के आधार पर मिलती है, ब्याज के आधार पर नहीं।
रिटायरमेंट के बाद क्या करना होगा?
जब आप पेंशन लेना शुरू करेंगे, तब समय-समय पर जरूरी दस्तावेज और Life Certificate जमा करना पड़ सकता है, ताकि पेंशन का भुगतान जारी रहे।
सबसे जरूरी बात, अक्सर लोग सिर्फ PF बैलेंस देखते हैं और यह भूल जाते हैं कि उनके लिए EPS भी चल रही है।
अगर आपने कई साल प्राइवेट नौकरी की है, तो एक बार जरूर जांच लें-
आपकी EPS सदस्यता है या नहीं।
आपकी कुल Pensionable Service कितनी हो चुकी है।
आपके रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट हैं या नहीं।
आज की छोटी-सी जांच, रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन का रास्ता आसान बना सकती है। रिटायरमेंट की प्लानिंग सिर्फ PF में जमा बड़ी रकम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। EPS-95 उन लाखों प्राइवेट कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है, जो नौकरी के बाद नियमित मासिक आय चाहते हैं। यदि आपने 10 साल या उससे अधिक की पात्र सेवा पूरी की है और नियमों का पालन किया है, तो यह योजना आपके बुढ़ापे में आर्थिक सहारा बन सकती है। इसलिए अपने EPF के साथ-साथ EPS की जानकारी भी समय-समय पर जरूर जांचते रहें।


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