एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करने की आखिरी तारीख 15 जून बेहद करीब है। अगर आपकी टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा बनती है, तो आपको अभी कुल टैक्स का 15 फीसदी हिस्सा चुकाना होगा। यह नियम रेंट, कैपिटल गेन्स और फ्रीलांसिंग से होने वाली कमाई पर भी लागू होता है। इस डेडलाइन को नजरअंदाज करने पर सेक्शन 234C के तहत ब्याज का जुर्माना लग सकता है। समय पर भुगतान करने से आप एक्स्ट्रा खर्च से बचेंगे और आपका टैक्स रिकॉर्ड भी दुरुस्त रहेगा।
नौकरीपेशा लोगों को आमतौर पर इसकी चिंता नहीं होती क्योंकि कंपनियां उनका TDS पहले ही काट लेती हैं। हालांकि, अगर आपकी डिविडेंड या क्रिप्टो से मोटी कमाई हो रही है, तो आपको अपनी टैक्स देनदारी का हिसाब ध्यान से लगाना चाहिए। अचानक हुई कमाई पर पेनल्टी से बचने के लिए 'सेफ-हार्बर' नियम आपकी मदद करते हैं, बशर्ते आप बाद में सही तरीके से भुगतान कर दें। वहीं, जिन सीनियर सिटीजन्स की बिजनेस से कोई इनकम नहीं है, उन्हें यह पीरियोडिक पेमेंट करने की जरूरत नहीं है। सही कैलकुलेशन सुनिश्चित करता है कि आप न तो ज्यादा टैक्स भरें और न ही किसी कानूनी पचड़े में फंसें।

AIS और Form 26AS की मदद से ऐसे मैनेज करें अपना एडवांस टैक्स
सबसे पहले अपनी मौजूदा कमाई का सटीक अंदाजा लगाने के लिए एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 16 चेक करें। इसके बाद फॉर्म 26AS देखें ताकि पता चल सके कि आपका कितना टैक्स पहले ही कट चुका है। अपनी कुल सालाना टैक्स देनदारी का अनुमान लगाने के लिए इनकम टैक्स विभाग के ऑफिशियल कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें। फिर पहली किस्त के तौर पर उस कुल राशि का 15 फीसदी कैलकुलेट करें। इन आंकड़ों पर पहले से नजर रखने से फाइनल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय गलतियों की गुंजाइश नहीं रहती।
| किस्त की अवधि | कुल बकाया एडवांस टैक्स |
|---|---|
| 15 जून या उससे पहले | कम से कम 15 फीसदी |
| 15 सितंबर या उससे पहले | कम से कम 45 फीसदी |
| 15 दिसंबर या उससे पहले | कम से कम 75 फीसदी |
| 15 मार्च या उससे पहले | 100 फीसदी |
आजकल UPI जैसे पेमेंट ऑप्शन्स ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। आप e-Pay टैक्स पोर्टल पर जाकर UPI के जरिए तुरंत अपना ट्रांजैक्शन पूरा कर सकते हैं। चालान भरते समय हमेशा यह चेक करें कि आपने सही असेसमेंट ईयर (Assessment Year) चुना है या नहीं। टैक्स कम जमा करने पर सेक्शन 234C और 234B के तहत हर महीने 1% की दर से ब्याज देना पड़ सकता है। वक्त पर टैक्स भरना आपकी फाइनेंशियल डिसिप्लिन को दर्शाता है और आपको फालतू ब्याज के बोझ से बचाता है।
आखिरी समय की भागदौड़ और देरी से बचने के लिए 15 जून से पहले ही अपने बैंक रिकॉर्ड्स चेक कर लें। अपनी डिजिटल टैक्स रसीदों को संभाल कर रखें, क्योंकि अगले साल ITR फाइल करते समय इनकी जरूरत पड़ेगी। सही रिकॉर्ड रखने से भविष्य में टैक्स विभाग की किसी भी पूछताछ का जवाब देना आसान हो जाता है। डेडलाइन से पहले काम निपटाने से आप तनाव मुक्त रहते हैं और अपनी बचत को भी सुरक्षित रखते हैं। टैक्स की सही प्लानिंग ही वित्तीय जिम्मेदारियों को कुशलता से निभाने का सबसे बेहतर तरीका है।


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