कर्इ व्यक्ति होम लोन और प्रोपर्टी लोन का अन्तर नहीं समझ पाते हैं और भ्रमित हो जाते हैं। कभी-कभी अपनी सुविधा के अनुसार इसका महत्व समझे बिना एक के स्थान पर दूसरे की शर्तों को बता देते हैं, जबकि दोनों प्रकार के लोन में भारी अन्तर है।
होम लोन और प्रोपर्टी लोन का अन्तर समझे
इसमें कोर्इ संदेह नहीं है कि होम लोन बने बनाये मकान के लिए लिया जाता है या उस पर लिया जाता है, जो पूरा बन चुका है। तात्पर्य है- होम लोन मकान बनाने के लिए या बना बनाया मकान खरीदने के लिए लिया जाता है।
होम लोन और प्रोपटी लोन में मुख्य अंतर यह है कि प्रोपर्टी लोन पर आय कर में कोर्इ छूट नहीं होती है, जबकि होम लोन पर छूट मिलती है। उदाहरण के लिए होम लोन की प्रिंसिपल राशि जमा कराने की डेढ़ लाख रुपये तक की राशि पर आयकर की छूट मिलती है। उसी तरह होमलोन पर लिया जाने वाला दो लाख तक ब्याज पर आयकर की छूट होती है।
दूसरी तरफ प्रोपटी लोन पर आयकर में छूट नहीं मिलती है। हॉं, व्यवसायी आयकर के अन्य प्रावधानों के तहत आयकर की छूट पाने के लिए क्लेम करते हैं। प्रोपर्टी लोन किसी भी प्रयोजन से लिया जा सकता है, जबकि होम लोन केवल मकान बनाने या बना बनाया मकान खरीदने के लिए ही लिया जाता है। दूसरे शब्दों में आप अपनी प्रोपटी को गिरवी रख कर बच्चों की उच्च शिक्षा, व्यवसाय का विस्तार, शादी या किसी आकस्मिक बीमारी के इलाज के लिए प्रापर्टी लोन ले सकते हैं।
प्रोपर्टी लोन का भुगतान व्यक्ति को किया जाता है, जबकि होम लोन का भुगतान बिल्डर या मकान बेचने वाले विक्रेता, जो भी मामला हो, किया जा सकता। दोनो मामलों में बैंक और वित्तीय संस्थान जो लोन देता है, उन सभी दस्तावेजो की पूरी जांच करता है, जिस पर लोन लिया जाता है। उधार देने के पहले ये संस्थान दस्तावेजो के संबंध में प्रश्न भी पूछते है।
दोनो केस में एक समानता यह भी है कि लोन को पुन: अदा करने में असमर्थता पर बैंक उस प्रोपर्टी को बेचने का अधिकार रखता है, जिस पर लोन दिया गया है या जिसे गिरवी रख कर लोन दिया गया है। होम लोन के लिए ज्यादा दस्तावेज देने रहते हैं। ब्याज की दरों में भी अन्तर होता है। होम लोन पर ब्याज की दरें कम होती है, जबकि प्रोपर्टी लोन पर ब्याज की दर आधिक होती है।
बाजार में प्रतिस्पर्धी लोन देने वाले निकायों की उपलब्धता है। निष्कर्षत: होम लोन सम्पदा के निमार्ण के लिए लिया जाता है। दसरी ओर प्रोपर्टी लोन उस सम्पदा पर लिया जाता है, जो पहले ही बनी हुर्इ है। बहुत कम व्यक्ति प्रोपर्टी पर लोन लेते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते हैं कि उनकी प्रोपर्टी किन्ही कारणों से बिक जाय। इसीलिए जरुरत पड़ने पर अक्सर लोग प्रोपर्टी को गिरवी रखने के बजाय पर्सनल लोन या गोल्ड़ लोन का विकल्प चुनते हैं।
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