Wipro Buyback: 15,000 करोड़ का मौका! रिटेल निवेशकों के लिए कमाई का शानदार तरीका, ऐसे करें अप्लाई

विप्रो (Wipro) का 15,000 करोड़ रुपये का बायबैक प्रोग्राम आज से शुरू हो गया है। लाखों रिटेल निवेशकों के लिए यह प्रीमियम पर शेयर बेचकर निकलने का एक शानदार मौका है। इस बायबैक के लिए टेंडर विंडो 11 जून से 17 जून तक खुली रहेगी। इसमें वे रिटेल निवेशक हिस्सा ले सकते हैं, जिनके पास 5 जून की रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयर थे। शॉर्ट-टर्म में मुनाफा कमाने की चाहत रखने वालों के लिए यह एक अहम मौका है।

अक्सर ऐसी कॉर्पोरेट घोषणाओं में छोटे शेयरधारकों को प्राथमिकता दी जाती है। सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, बायबैक का 15 प्रतिशत हिस्सा छोटे निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है। अगर रिकॉर्ड डेट पर आपके पास मौजूद शेयरों की कुल वैल्यू 2 लाख रुपये से कम थी, तो आप इस कैटेगरी के लिए पात्र हैं। इस कैटेगरी में आमतौर पर शेयरों के स्वीकार होने की दर (Acceptance Rate) अधिक रहती है, जिससे छोटे निवेशकों को अपना रिटर्न बढ़ाने में मदद मिलती है।

Wipro Buyback 2026: How Retail Investors Can Earn Profit, Acceptance Ratio, and Step-by-Step Guide

Wipro Buyback: समझिए एक्सेप्टेंस रेशियो का पूरा गणित

कंपनी ने रिटेल कैटेगरी के लिए एंटाइटेलमेंट रेशियो 11:56 तय किया है। इसका मतलब है कि आपके पास मौजूद हर 56 शेयरों में से 11 शेयरों की खरीदारी पक्की है। हालांकि, फाइनल एक्सेप्टेंस रेशियो अक्सर इस न्यूनतम सीमा से ज्यादा ही रहता है। अगर कम निवेशक इसमें हिस्सा लेते हैं, तो आपके ज्यादा शेयर स्वीकार किए जा सकते हैं। मुनाफे का सही अंदाजा लगाने के लिए इस गणित को समझना बेहद जरूरी है।

निवेशक कैटेगरीएंटाइटेलमेंट रेशियोरिजर्व हिस्सा
छोटे शेयरधारकहर 56 शेयर पर 11 शेयरकुल ऑफर का 15%
जनरल कैटेगरीहर 603 शेयर पर 1 शेयरकुल ऑफर का 85%

अप्लाई करने का तरीका और जोखिम

बायबैक में हिस्सा लेने के लिए निवेशकों को अपने ब्रोकर के जरिए टेंडर ऑफर विंडो का इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए अपने ट्रेडिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें और 'कॉर्पोरेट एक्शन' (Corporate Actions) सेक्शन में जाएं। वहां विप्रो ऑफर को चुनकर अपने शेयरों की संख्या दर्ज करें। ध्यान रहे कि आपको 17 जून दोपहर 3:30 बजे से पहले अपनी रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी। रिक्वेस्ट सबमिट करते ही आपके शेयर ब्लॉक हो जाएंगे।

बायबैक में प्रीमियम मिलने के साथ-साथ कुछ बाजार जोखिम भी जुड़े होते हैं। जो शेयर बायबैक में स्वीकार नहीं किए जाएंगे, वे वापस आपके डीमैट अकाउंट में आ जाएंगे। टेंडर विंडो बंद होने के बाद शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। टैक्स के नजरिए से यह फायदेमंद है क्योंकि कंपनी खुद एग्जिट टैक्स का भुगतान करती है। किसी भी तकनीकी दिक्कत से बचने के लिए आखिरी समय का इंतजार न करें और समय रहते प्रक्रिया पूरी करें।

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