El Nino: अल नीनो का बढ़ता खतरा, कमजोर मानसून से कृषि तक...जानिए किन 5 मोर्चों पर सबसे ज्यादा असर

El Nino: देश में अल नीनो के प्रभाव के चलते कमजोर मानसून की आशंका गहराती जा रही है। इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल नीनो से होने वाली चुनौतियों की समीक्षा के लिए हर सप्ताह बैठकें आयोजित की जाएंगी और उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां इसके प्रभाव की संभावना सबसे अधिक है। इस साल मानसून के दौरान अब तक सामान्य से लगभग 35% कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह कमी 60% तक पहुंच गई है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

El Nino

अल नीनो से किन पांच मोर्चों पर सबसे ज्यादा असर?

अल नीनो की सबसे बड़ी चुनौती जलाशयों में घटते जल स्तर के रूप में सामने आ रही है। देश के कई बड़े जलाशयों में पानी का भंडार कमजोर स्थिति में है, जिससे आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के शहरों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। जलाशयों से लगातार पानी निकाले जाने के कारण शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

दूसरी बड़ी चुनौती कृषि क्षेत्र से जुड़ी है। कम बारिश के कारण धान, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कृषि क्षेत्र की विकास दर में गिरावट आ सकती है और कृषि से जुड़ा सकल मूल्य वर्धन (GVA) 1.5% से नीचे जा सकता है। जून के बाद फसलों के रकबे और उत्पादन के आंकड़े सामने आने पर वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।

तीसरी चुनौती बिजली क्षेत्र के सामने खड़ी हो सकती है। गर्मी और सूखे की स्थिति में बिजली की मांग बढ़ जाती है, जबकि जल की कमी के कारण हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित होता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में पहले से ही बिजली कटौती की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है तो बिजली आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना और मुश्किल हो सकता है।

चौथी चिंता यह है कि कमजोर खरीफ सीजन का असर केवल वर्तमान फसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव रबी फसलों पर भी पड़ सकता है। पर्याप्त नमी और जल भंडारण नहीं होने से रबी सीजन की बुवाई और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे कृषि उत्पादन का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है और खाद्यान्न आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

पांचवीं और सबसे व्यापक चुनौती महंगाई से जुड़ी है। कृषि उत्पादन में कमी आने पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। हाल के थोक महंगाई के आंकड़े भी बढ़ते दबाव का संकेत दे रहे हैं। यदि फसलों का उत्पादन घटता है तो खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

अल नीनो का प्रभाव केवल मानसून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संसाधनों, कृषि उत्पादन, बिजली आपूर्ति, महंगाई और आर्थिक विकास जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि सरकार, कंपनियां, निवेशक और बाजार सभी इस चुनौती से निपटने की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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