PM Modi Visits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 6 जुलाई को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिन की यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री इन तीनों देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, सहयोग के अहम क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे, बिजनेस लीडर्स से मिलेंगे और भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे।

पीएम मोदी सेशेल्स की तीन दिन की यात्रा के बाद 29 जून को भारत लौटे थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की थी। प्रधानमंत्री अपनी यात्रा की शुरुआत राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा से करेंगे। यह पीएम मोदी की इंडोनेशिया की चौथी यात्रा होगी और मई 2018 में भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम
यात्रा के दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया में गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी का भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लेने का कार्यक्रम है, जहां वह दोनों देशों के प्रमुख व्यापारिक हस्तियों को संबोधित करेंगे, और भारतीय प्रवासियों के साथ भी बातचीत करेंगे, जिसे सरकार ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बताया है।
ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड दौरान
ऑस्ट्रेलिया के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर दो दिन की यात्रा पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यह यात्रा चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली राजकीय यात्रा होगी। न्यूजीलैंड में, प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन दोनों देशों के बीच संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। बातचीत में मुख्य रूप से पिछले दो वर्षों में हुई अहम प्रगति पर चर्चा होने की उम्मीद है, खासकर व्यापार, वाणिज्य और रक्षा के क्षेत्रों में।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता
भारत और न्यूजीलैंड ने इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच सामान और सेवाओं के व्यापार को बढ़ाने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता न्यूजीलैंड से आने वाले सामान पर 95% टैरिफ (आयात शुल्क) को खत्म कर देगा। इसमें वेलिंगटन की ओर से 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा शामिल है, जो भारत की विकास गाथा में भरोसे का संकेत है।


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