US-Iran के बीच 100 दिनों से ज्यादा समय तक चले संघर्ष के बाद शांति समझौते की खबर सामने आई है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं (Economy) को प्रभावित किया और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ। भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी, साथ ही व्यापार और समुद्री आवाजाही भी सामान्य हो सकेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत इस समझौते के जरिए क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद करता है। PM ने कहा कि यह समझौता इलाके में सामान्य हालात बहाल करने में मदद करेगा और व्यापार तथा परिवहन की स्वतंत्रता को मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने ये भी उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच बाकी बचे मुद्दों का समाधान भी बातचीत के जरिए निकलेगा।
समझौते से क्षेत्र में शांति लौटेगी-
प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि इस समझौते को सही तरीके से लागू किए जाने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौटेगी। साथ ही लोगों और सामान की आवाजाही तथा व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत को भरोसा है कि बाकी बचे मुद्दों का समाधान भी बातचीत के जरिए निकाला जाएगा, जिससे भविष्य में एक स्थायी और व्यापक समझौता हो सके।
जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर-
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है और 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। समझौते के तहत हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और तेल आपूर्ति को सामान्य करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट-
इस खबर का असर वैश्विक बाजारों में भी देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
पीएम मोदी लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-ईरान समझौते पर भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक हितों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।


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