Trump के हालिया बयान के बाद एक बार फिर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। 8 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिला, जब Sensex और Nifty में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अगले कारोबारी दिन बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई और Nifty फिर से 24,000 के आसपास पहुंच गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक अस्थायी झटका था या आने वाले दिनों में बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है?

Iran-US तनाव और Crude Oil Prices
Financial Expert Adib Noorani का मानना है कि मौजूदा समय में सबसे बड़ा ट्रिगर Crude Oil की कीमतें हैं। यदि Middle East में तनाव और बढ़ता है और Crude Oil 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल जाता है, तो इसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा। इससे महंगाई बढ़ सकती है और कई सेक्टर्स की लागत भी प्रभावित होगी।
हालांकि फिलहाल Crude Oil 77-78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। जब तक कीमतों में तेज उछाल नहीं आता, तब तक बाजार पर सीमित असर रहने की संभावना है।
हर सेक्टर पर नहीं होगा एक जैसा असर
Noorani के अनुसार बाजार में गिरावट जरूर आई, लेकिन सभी सेक्टर्स समान रूप से प्रभावित नहीं हुए। जिन कंपनियों का कारोबार सीधे Crude Oil पर निर्भर है, जैसे Aviation, Paint, Tyre और Oil Marketing Companies, उन पर दबाव अधिक देखने को मिल सकता है।
वहीं दूसरी ओर Oil Producers और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियां अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। ऐसे समय में निवेशकों को केवल इंडेक्स देखने के बजाय सेक्टर और कंपनी आधारित रणनीति अपनानी चाहिए।
Earnings Season तय करेगा बाजार की दिशा
अब बाजार की नजर पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों पर है। TCS के साथ Earnings Season की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में कई बड़ी कंपनियों के नतीजे सामने आएंगे।
अगर कंपनियों के मुनाफे और प्रबंधन की भविष्य की गाइडेंस उम्मीद से बेहतर रहती है, तो मौजूदा वैश्विक तनाव के बावजूद बाजार में मजबूती लौट सकती है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल Geopolitical News ही नहीं बल्कि Corporate Earnings पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
किन सेक्टर्स पर रखें फोकस?
Adib Noorani के मुताबिक मौजूदा समय में IT सेक्टर में धीरे-धीरे रिकवरी की संभावना बन रही है। लंबे समय से दबाव में रहे अच्छे IT Stocks भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसके अलावा Auto Sector पर भी नजर रखने की सलाह दी गई है। यदि मानसून सामान्य रहता है और ग्रामीण मांग मजबूत होती है तो ऑटो कंपनियों को फायदा मिल सकता है। FMCG और Realty सेक्टर भी आने वाले महीनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
Gold और Silver में क्या करें?
हाल के महीनों में Gold और Silver दोनों में गिरावट देखने को मिली है। इसके बावजूद विशेषज्ञ का मानना है कि Bullion में निवेश पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है।
सलाह यह है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाए। जिन निवेशकों के पास कम पूंजी है, वे Gold ETF या Silver ETF के जरिए भी निवेश कर सकते हैं। लंबी अवधि में यह रणनीति बेहतर रिटर्न दे सकती है।
नए निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
अगर आप पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने जा रहे हैं तो एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। SIP या चरणबद्ध निवेश का तरीका ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
Noorani का कहना है कि Market Panic के दौरान अच्छी कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। वहीं अनुभवी निवेशक थीम आधारित निवेश, जैसे IT, EV और चुनिंदा Midcap सेक्टर्स पर भी नजर रख सकते हैं।
Long Term Investors के लिए बड़ी सलाह
Experts का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार ने लंबे समय में हमेशा मजबूत रिटर्न दिए हैं। ऐसे में घबराकर निवेश बंद करने की बजाय अनुशासित निवेश जारी रखना ज्यादा समझदारी होगी।
Nifty Next 50 ETF, Midcap ETF और Diversified Portfolio के जरिए लंबे समय तक निवेश करने वाले निवेशक बेहतर Wealth Creation कर सकते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन मजबूत कंपनियों और सही Asset Allocation के साथ लंबी अवधि का नजरिया ही सबसे बड़ी रणनीति साबित हो सकता है.


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