TCS vs Accenture Share: वैश्विक आईटी सेक्टर में मंदी के बादलों के बीच टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) के मामले में अपनी अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी एक्सेंचर (Accenture) को पीछे छोड़ दिया है। फरवरी 2021 के बाद यह पहला मौका है जब टीसीएस ने इस दौड़ में एक्सेंचर पर बढ़त बनाई है। यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में आया है जब एक्सेंचर के कमजोर गाइडेंस ने दुनिया भर के शेयरों को हिला दिया है।

वैश्विक आईटी खर्च में मंदी की आशंकाओं के चलते एनएसई (NSE) पर टीसीएस के शेयर दबाव में आ गए। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर लगभग 5.67% टूटकर 2,078.40 रुपये पर आ गया। सत्र के दौरान इसने 2,059.90 रुपये का स्तर छुआ, जो करीब छह साल का निचला स्तर है। हालांकि, भारी बिकवाली के बीच भी टीसीएस वैल्यूएशन में बढ़त बनाने में सफल रही।
दरअसल, अमेरिकी कंपनी एक्सेंचर के कमजोर रेवेन्यू आउटलुक के कारण टीसीएस और एक्सेंचर दोनों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट के बाद टीसीएस का मार्केट कैपिटलाइजेशन 84.6 बिलियन डॉलर रहा, जो एक्सेंचर के 77.6 बिलियन डॉलर के मुकाबले अधिक है। दोनों कंपनियों के बीच यह मुकाबला लंबे समय से चल रहा था, लेकिन एक्सेंचर लंबे समय से आगे थी।
एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
एक्सेंचर के बाजार मूल्य में भारी गिरावट की मुख्य वजह कंपनी द्वारा चौथी तिमाही के लिए जारी कमजोर रेवेन्यू आउटलुक है। इसके साथ ही कंपनी ने पूरे साल के ग्रोथ अनुमान के ऊपरी दायरे को भी घटा दिया है। 31 मई को समाप्त तिमाही में कंपनी की नई बुकिंग में 2 प्रतिशत की कमी आई है, जो दर्शाती है कि वैश्विक क्लाइंट्स अब आईटी और कंसल्टिंग प्रोजेक्ट्स पर खुलकर खर्च नहीं कर रहे हैं।
Discretionary Spending में इस कटौती का असर एक्सेंचर के शेयर प्रदर्शन पर काफी दिखाई दिया है। इस साल की शुरुआत से अब तक एक्सेंचर का स्टॉक अपनी आधी से ज्यादा वैल्यू खो चुका है। इसके मुकाबले टीसीएस के वैल्यूएशन में लगभग 30% की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि वैश्विक मंदी के इस कठिन दौर में भारतीय आईटी कंपनियों का मॉडल संकट से निपटने में अधिक सक्षम है।
रिकॉर्ड स्तरों से नीचे फिसला दोनों कंपनियों का वैल्यूएशन
बाजार की बदलती परिस्थितियों और तकनीकी खर्चों में कटौती के कारण दोनों ही कंपनियों का वर्तमान वैल्यूएशन इनके रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे आ चुका है। दिसंबर 2021 में एक्सेंचर ने लगभग 263 बिलियन डॉलर का अपना सर्वकालिक उच्च मार्केट कैप हासिल किया था। वहीं, टीसीएस ने जनवरी 2022 में 200 बिलियन डॉलर की ऐतिहासिक सीमा को पार किया था, लेकिन आर्थिक मंदी ने पूरा समीकरण ही बदल दिया।
भारतीय आईटी सेक्टर पर एक्सेंचर के प्रदर्शन का असर
एक्सेंचर के वित्तीय प्रदर्शन का सीधा संबंध भारतीय आईटी कंपनियों से है क्योंकि इसका एक बड़ा काम भारत से ही संचालित होता है। लगभग 72 बिलियन डॉलर का सालाना राजस्व हासिल करने वाली इस कंपनी के पास करीब 7,98,000 कर्मचारी हैं। इनमें से लगभग 75% कर्मचारी भारत और फिलीपींस जैसे कम लागत वाले केंद्रों में हैं। अकेले भारत में ही इसके अनुमानित 3,25,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।
इतने बड़े पैमाने पर काम करने के कारण जब एक्सेंचर अपनी परियोजनाओं में कटौती करती है, तो उसका सीधा असर भारतीय आईटी सेंटिमेंट पर पड़ता है। भारतीय कंपनियों के भविष्य के प्रदर्शन को बाजार एक्सेंचर के गाइडेंस के पैमाने पर ही मापता है। यही वजह है कि एक्सेंचर की मंदी ने भारतीय आईटी इंडेक्स में भारी हलचल पैदा कर दी है, जिससे घरेलू बाजार के अन्य बड़े शेयर भी कल लाल निशान पर आ गए।
ब्रोकरेज हाउसेज का क्या है मानना?
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने आईटी सेक्टर के सेंटिमेंट पर नकारात्मक नजरिया व्यक्त किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, आउटसोर्सिंग डील्स में कमी, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और बड़े क्लाइंट्स की सतर्कता कंपनियों की ग्रोथ को प्रभावित कर रही है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में नए मौके बन रहे हैं, लेकिन पारंपरिक आईटी खर्च में आई कमी की भरपाई के लिए एआई से मिलने वाला बिजनेस अभी बहुत छोटा है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, आउटसोर्सिंग बुकिंग में सालाना आधार पर 14.7% की गिरावट आई है। इसके अलावा, कंपनी ने मध्य पूर्व संकट के सीधे प्रभाव और यूरोप तथा अफ्रीका (EMEA) क्षेत्रों में निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी होने की बात कही है। यही कारण है कि आगामी दो-तीन तिमाहियों में बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर और दबाव में रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
वहीं वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने एक्सेंचर पर 'होल्ड' रेटिंग बरकरार रखी है और लक्ष्य 185 डॉलर तय किया है। जेफरीज के अनुसार, ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स और विवेकाधीन तकनीकी खर्चों पर रोक लगाने के कारण एक्सेंचर के कंसल्टिंग सेगमेंट पर बड़ा दबाव बना हुआ है। अधिकांश कंपनियां वर्तमान अनिश्चितता के दौर में नए निवेश टाल रही हैं, जिसके चलते निकट भविष्य में इस क्षेत्र में रिकवरी कठिन दिखाई दे रही है।
वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट के बीच आईटी कंपनियों के सामने अपनी विकास दर को बचाए रखने की गंभीर चुनौती है। निवेशकों के लिए अब क्लाइंट्स के खर्च करने के पैटर्न और ब्याज दरों में बदलाव जैसी व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी होगा। टीसीएस द्वारा एक्सेंचर को पछाड़ना भले ही राहत की खबर हो, लेकिन सेक्टर में वास्तविक सुधार के लिए वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च का बढ़ना ही निर्णायक साबित होगा।
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