Share Market में एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और मुनाफावसूली ने पूरे बाजार पर दबाव बना दिया। शुरुआत में बाजार में स्थिरता देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली हावी होती गई और निफ्टी एक बार फिर उसी पुराने रेंज में लौटता नजर आया, जहां से निकलने के लिए पिछले कई सत्रों में कोशिश की गई थी।

मार्केट की शुरुआत लगभग सपाट रही और शुरुआती गिरावट करीब 30 अंकों तक सीमित थी। सुबह 11:30 बजे तक निफ्टी एक दायरे में ही कारोबार करता रहा, लेकिन इसके बाद अचानक तेज बिकवाली शुरू हो गई। देखते ही देखते निफ्टी 200 अंक से ज्यादा टूट गया। बैंकिंग सेक्टर पर भी दबाव बढ़ा और बैंक निफ्टी लाल निशान में चला गया।
कोस्पी इंडेक्स 10% तक क्रैश कर गया-
गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। ग्लोबल मार्केट्स में भी कमजोरी देखने को मिली। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स 2% से ज्यादा गिर गए, जबकि एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव रहा। जापान का Nikkei 225 3% से ज्यादा टूटा, हांगकांग का Hang Seng करीब 1.75% नीचे रहा और शंघाई कंपोजिट भी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। सबसे बड़ी गिरावट दक्षिण कोरिया के बाजार में देखने को मिली, जहां Kospi इंडेक्स करीब 10% तक क्रैश कर गया। इस तेज गिरावट के चलते कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी। बाद में बाजार खुला तो बिकवाली और तेज हो गई। Samsung Electronics जैसे बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस घटना ने ग्लोबल निवेशकों में घबराहट बढ़ा दी और इसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा।
गिरावट के पीछे वैल्यूएशन बड़ा कारण-
इस गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण हाल ही में बढ़ी वैल्यूएशन चिंता मानी जा रही है। खासकर कोरिया और सेमीकंडक्टर सेक्टर में पिछले महीनों में तेज तेजी देखी गई थी, जिसके बाद अब निवेशक प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी टेक शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। Amazon, Microsoft और Alphabet जैसे बड़े स्टॉक्स 2% से लेकर 5% तक टूट गए। हाल ही में तेजी से चर्चा में आए SpaceX जैसे स्टॉक्स में भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे टेक सेक्टर में दबाव और बढ़ गया।
निफ्टी ने 23,900 के स्तर को भी तोड़ा-
भारतीय बाजार की बात करें तो शुरुआती कारोबार के बाद तेज गिरावट देखने को मिली और निफ्टी 24,000 के नीचे फिसलकर 23,900 के स्तर को भी तोड़ गया। इसी दौरान India VIX 9% से ज्यादा बढ़कर 14 के करीब पहुंच गया, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है। सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल और IT सेक्टर में देखने को मिला। मेटल इंडेक्स 3% से ज्यादा गिरा, जबकि IT इंडेक्स में करीब 2% की कमजोरी रही। NALCO, Hindalco, NMDC और Hindustan Zinc जैसे मेटल शेयरों में 3% से 4.5% तक की गिरावट दर्ज की गई। Vedanta में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां स्टॉक करीब 9% तक टूट गया। इसकी वजह कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री से जुड़ी रिपोर्ट को माना जा रहा है, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में गिरावट-
मेटल सेक्टर पर दबाव की एक और वजह वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में गिरावट रही। US-Iran शांति वार्ता में प्रगति की खबरों से सप्लाई बाधित होने की आशंका कम हुई, जिससे एल्युमीनियम की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गईं। IT सेक्टर में भी लगातार दबाव बना रहा। Wipro, TCS, Infosys और HCL Tech जैसे बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों की कमजोरी माना जा रहा है। ग्लोबल संकेत कमजोर रहने से भारतीय IT सेक्टर पर भी सीधा असर पड़ा और निवेशकों ने लगातार बिकवाली की।
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की मजबूती-
हालांकि, इस गिरावट के बीच फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली। इन सेक्टर्स ने बाजार को सपोर्ट देने की कोशिश की, लेकिन बाकी सभी सेक्टर्स में बिकवाली इतनी तेज थी कि पूरा बाजार दबाव में रहा। कुल मिलाकर आज का सत्र यह दिखाता है कि बाजार अभी भी ग्लोबल संकेतों और सेक्टोरल अनिश्चितताओं के बीच फंसा हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में इसी तरह की रेंज-बाउंड और वोलैटाइल मूवमेंट देखने को मिल सकती है।
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