RBI Monetary Policy: Budget से पहले Repo rate पर बड़ा फैसला, जानिए आम आदमियों के फायदे

RBI Monetary Policy Decision Today: रिजर्व बैंक की मॉनिटरी कमेटी की बैठक के बाद गर्वनर शक्तिकांत दास ने आज लगातार पांचवीं बार रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया है। इस प्रकार से रेपो रेट 6.50 फीसदी पर बनी रहेगी। रिजर्व बैंक का मानना है कि महंगाई नियंत्रण के बाहर नहीं है और अर्थव्यवस्था के अन्य इंडीकेटर अच्छे हैं।

  • वित्त वर्ष 2024 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत किया गया।
  • वित्त वर्ष 24 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 5.4% रहने का अनुमान है।
  • नवंबर में विनिर्माण पीएमआई में वृद्धि हुई, जबकि सर्विस पीएमआई में तेजी बनी रही।

वित्त वर्ष 2014 में देश की अर्थव्यवस्था की अनुमानित वृद्धि अब 7 प्रतिशत निर्धारित की गई है। तीसरी और चौथी तिमाही के लिए क्रमशः 6.5 प्रतिशत और 6 प्रतिशत का अनुमान आज जताया गया। वित्त वर्ष 2025 की पहली तीन तिमाहियों के लिए जीडीपी वृद्धि दर क्रमिक रूप से 6.7 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

RBI Monetary Policy Decision Today

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने घोषणा की है कि एसडीएफ और एमएसएफ के तहत तरलता सुविधा फिर से बहाल की जा रही है। यह सुविधा सप्ताहांत और छुट्टियों पर भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अक्टूबर और नवंबर में लगातार घाटे की स्थिति ने बैंकों को मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) और सिस्टमिक लेंडिंग फैसिलिटी (एसडीएफ) का उपयोग करने के लिए मजबूर किया था। इसके चलते सरकारी बांडों की खुले बाजार में बिक्री करने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।

  • अक्टूबर-दिसंबर 2023 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.6 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया।
  • जनवरी-मार्च 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया।
  • अप्रैल-जून 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया।
  • जुलाई-सितंबर 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 4.0 प्रतिशत आंका गया।
  • अक्टूबर-दिसंबर 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 4.7 प्रतिशत आंका गया।

फरवरी में आने वाले यूनियन बजट के पहले यह रिजर्व बैंक की आखिरी मौद्रिक नीति की बैठक है। अब अगली बैठक केन्द्रीय बजट के बाद होगी।

मोदी सरकार के कार्यकाल में रेपो रेट की हिस्ट्री

मोदी सरकार में रेपो रेट की हिस्ट्री काफी रोचक है। पूरे मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दर कभी उतना नहीं रही जितनी दर ठीक मोदी सरकार के शपथ के ठीक पहले थी। जब मोदी सरकार ने कार्यकाल संभाला तो रेपो रेट की दर 8 फीसदी थी, जो फिर कभी उतनी नहीं हुई है।

ये है रेपो रेट का सफर

  • -6 अक्टूबर 23 को 6.50 फीसदी
  • -10 अगस्त 23 को 6.50 फीसदी
  • -8 जून 23 को 6.50 फीसदी
  • -4 अप्रैल 23 को 6.50 फीसदी
  • -8 फरवरी 23 को 6.50 फीसदी
  • -7 दिसंबर 22 को 6.25 फीसदी
  • -30 सितंबर 22 को 5.90 फीसदी
  • -5 अगस्त 22 को 5.40 फीसदी
  • -8 जून 22 को 4.90 फीसदी
  • -4 मई 22 को 4.40 फीसदी
  • -10 फरवरी 22 को 4 फीसदी
  • -8 दिसंबर 21 को 4 फीसदी
  • -8 अक्टूबर 21 को 4 फीसदी
  • -6 अगस्त 21 को 4 फीसदी
  • -4 जून 21 को 4 फीसदी
  • -7 अप्रैल 21 को 4 फीसदी
  • -5 फरवरी 21 को 4.00 फीसदी
  • -4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
  • -9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
  • -6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
  • -22 मई 2020 को 4.00 फीसदी
  • -27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी
  • -4 अक्टूबर 2019 को 5.15 फीसदी
  • -7 अगस्त 2019 को 5.40 फीसदी
  • -6 जून 19 को 5.75 फीसदी
  • -04 अप्रैल 19 को 6.00 फीसदी
  • -07 फरवरी 19 को 6.25 फीसदी
  • -05 दिसंबर 18 को 6.50 फीसदी
  • -05 अक्टूबर 18 को 6.50 फीसदी
  • -01 अगस्त 18 को 6.50 फीसदी
  • -06 जून 18 को 6.25 फीसदी
  • -05 अप्रैल 18 को 6.00 फीसदी
  • -07 फरवरी 18 को 6.00 फीसदी
  • -06 दिसंबर 17 को 6.00 फीसदी
  • -04 अक्टूबर 17 को 6.00 फीसदी
  • -02 अगस्त 17 को 6.00 फीसदी
  • -08 जून 17 को 6.25 फीसदी
  • -06 अप्रैल 17 को 6.25 फीसदी
  • -08 फरवरी 17 को 6.25 फीसदी
  • -07 दिसंबर 16 को 6.25 फीसदी
  • -04 अक्टूबर 16 को 6.25 फीसदी
  • -05 अप्रैल 16 को 6.50 फीसदी
  • -29 सितंबर 15 को 6.75 फीसदी
  • -02 जनवरी 15 को 7.25 फीसदी
  • -04 मार्च 15 को 7.50 फीसदी
  • -15 जनवरी 15 को 7.75 फीसदी

एमपीसी के 6 सदस्य कौन

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के अलावा 4 नॉमित सदस्य हैं। इनके नाम हैं आशिमा गोयल, राजीव रंजन, जयन्त आर. वर्मा और शशांक भिडे।

मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

क्या होती है रेपो रेट: रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे, जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह।

क्या होती है रिवर्स रेपो रेट: जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे।

क्या होती है सीआरआर: देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

क्या होती है एसएलआर: जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।

आरबीआई की तरफ से घोषित रेपो उसी तरह रहीं हैं, जैसा गुडरिटर्न ने अपने पोल में अनुमान जाहिए किया था। अगर आप खबर पढ़ना चाहें तो लिंक नीचे दिया जा रहा है।

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