Petrol Diesel Rate: सरकार ने आज से डीजल पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर SAED को 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बनाए रखा है। सरकारें कई सेक्टर और कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाती हैं ताकि उनके अचानक हुए मुनाफे के एक हिस्से को कंट्रोल किया जा सके। आम तौर पर, विंडफॉल टैक्स इसलिए लगाया जाता है ताकि इंडस्ट्रीज के बीच उचित मूल्य का संतुलन बना रहे और जियोपॉलिटिक्स जैसी मुश्किल मैक्रो स्थितियों के बीच कंपनियों को भविष्य में अवास्तविक मुनाफे का फायदा उठाने से रोका जा सके। लेकिन फिलहाल ये सवाल घुम रहा है कि क्या इस टैक्स की बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ेगा?

पेट्रोल और डीजल पर विंडफॉल टैक्स
16 जून से, डीजल पर SAED को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, पेट्रोल पर SAED 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बना हुआ है।
विंडफॉल टैक्स का OMCs और फ्यूल पर क्या असर पड़ता है?
टाटा कैपिटल की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, विंडफॉल टैक्स एक अस्थायी टैक्स है जो सरकारें उन कंपनियों पर लगाती हैं जो अचानक बाजार में बदलाव या बाहरी कारणों से अप्रत्याशित मुनाफा कमाती हैं। जब भारत ने घरेलू कच्चे तेल उत्पादकों और फ्यूल एक्सपोर्टर्स पर विंडफॉल टैक्स लगाया, तो इससे इन कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन कम हो गया, जिससे उनका फाइनेंशियल परफॉर्मेंस कम आकर्षक हो गया।
इससे अनिश्चितता भी पैदा हुई, जिससे इन्वेस्टमेंट और विस्तार की योजनाओं में देरी हो सकती है। बाजार के नजरिए से, इस टैक्स ने कंपनियों को ऊंची कीमतों का फायदा उठाने से रोककर तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद की। इसने भारतीय फ्यूल एक्सपोर्ट को कम प्रतिस्पर्धी बना दिया, जिससे एक्सपोर्ट की मात्रा में कमी आ सकती है।
ऑयल कंपनियों के शेयर पर रहेगी नजर
सरकार को विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी से फायदा होता है, लेकिन कंपनियों को नहीं। इसलिए, मंगलवार को BPCL, IOCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर नजर रहेगी।


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