भारतीय शेयर बाजार में आज भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऑटो कंपनियां (OEMs) जल्द ही मई महीने के बिक्री आंकड़े जारी करने वाली हैं, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है। निफ्टी ऑटो इंडेक्स इस समय बड़े संस्थागत निवेशकों के रडार पर है। जानकारों का मानना है कि पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं। ये आंकड़े सुबह की इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीति को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। आमतौर पर दमदार प्रदर्शन से संबंधित शेयरों में अच्छी तेजी आती है।
डीलरों से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट की डिमांड में थोड़ी सुस्ती देखी गई है। शहरों के बड़े शोरूम्स में गाड़ियों का बढ़ता स्टॉक (इन्वेंट्री) एक बड़ी चिंता बना हुआ है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में सुधार की वजह से टू-व्हीलर सेगमेंट में मजबूती बरकरार है। इस महीने शादियों के सीजन ने भी डिमांड बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। निवेशक अब रिटेल गैप पर नजर रख रहे हैं ताकि सेक्टर की सेहत का सही अंदाजा लगाया जा सके।

Nifty Auto sales analysis and trade setup
| सेगमेंट | मार्केट आउटलुक | टॉप ट्रेडिंग पिक |
|---|---|---|
| टू-व्हीलर्स | ग्रामीण इलाकों में मजबूत रिकवरी | बजाज ऑटो |
| पैसेंजर व्हीकल्स | इन्वेंट्री का ऊंचा स्तर | महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) |
| कमर्शियल व्हीकल्स | इंफ्रास्ट्रक्चर में सुस्ती | टाटा मोटर्स |
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी होने से कमर्शियल व्हीकल (CV) की बिक्री में मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। एनालिस्ट्स टाटा मोटर्स के भारी ट्रकों के डिस्पैच आंकड़ों पर करीबी नजर रख रहे हैं। वहीं, इस महीने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के आंकड़े चौंका सकते हैं। ये छोटे सेगमेंट अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था के बड़े रुझानों का पहले ही संकेत दे देते हैं। बेहतर समझ के लिए निवेशकों को महीने-दर-महीने (MoM) की ग्रोथ की तुलना सालाना औसत से करनी चाहिए।
आज मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स जैसे दिग्गज शेयरों पर खास फोकस रहेगा। एक्सपर्ट्स महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) को खास सपोर्ट लेवल पर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। बजाज ऑटो में हाई ओपन इंटरेस्ट (OI) किसी बड़े ब्रेकआउट का इशारा कर रहा है। एक्सपोर्ट को लेकर कोई भी अच्छी खबर इस शेयर में तेज एक्शन ला सकती है। मानसून शुरू होने से पहले पुराना स्टॉक निकालने के लिए कंपनियां इन दिनों रिटेल डिस्काउंट भी बढ़ा रही हैं।
बाजार में उतरने से पहले निवेशकों को बढ़ती ब्याज दरों और मानसून के अनिश्चित अनुमानों का भी ध्यान रखना होगा। अगर ग्रामीण इलाकों का सेंटिमेंट बिगड़ा, तो सेक्टर की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। रिटेल ट्रेडर्स आज जोखिम कम करने के लिए अलग-अलग सेगमेंट्स के बीच 'पेयर ट्रेड' की रणनीति अपना सकते हैं। डिमांड साइकिल को समझने के लिए ग्लोबल एक्सपोर्ट मिक्स पर नजर रखना भी जरूरी है। बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप लॉस के साथ ही काम करना चाहिए।


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