IRF Asks to Reduce GST on helmets: देश में दो पहिया वाहन चलाते समय सिर पर हेलमेट लगाना जरूरी है। केन्द्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के अनुसार दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

वाहन चलाते समय यह आपकी जान बचाने के लिए अहम किरदार निभाता है, आपने भी वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग किया होगा। हाल ही में इसी हेलमेट पर लगने वाले जीएसटी को खत्म करने के लिए आईआरएफ (अंतरराष्ट्रीय सड़क महासंघ) ने जीएसटी परिषद और वित्त मंत्रालय से हेलमेट पर लगने वाले टैक्स को 18 प्रतिशत से घटाकर 0 करने की मांग की है।
सड़क दुर्घटना के कारण होती हैं इतनी मौत
आईआरएफ ने इस बात की भी जानकारी दी कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक जोखिम दोपहिया वाहन चालकों का होता है। हेलमेट पर जीएसटी कम करने से वे अधिक किफायती हो जाएंगे, जिससे संभावित रूप से मृत्यु दर में कमी आएगी।
आईआरएफ ने बॉश रिपोर्ट का हवाला देते हुए संकेत दिया कि भारत में वैश्विक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों का लगभग 12% हिस्सा है, जिससे 15.71-38.81 बिलियन अमरीकी डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है।
आईआरएफ के मानद अध्यक्ष के.के. कपिला ने यह भी कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में लगभग 31.4% मौतें दोपहिया वाहन चालकों की होती हैं, जो मुख्य रूप से सिर की चोटों के कारण होती हैं। हेलमेट का उपयोग इन दुर्घटनाओं को कम करने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।
इसके बावजूद भारत में हेलमेट का उपयोग बहुत कम है। कई दोपहिया वाहन चालक आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं और सस्ते, घटिया हेलमेट पहनते हैं।
जीएसटी में कटौती से उच्च गुणवत्ता वाले हेलमेट ज़्यादा बेहतर हो सकते हैं और घटिया हेलमेट खरीदने के लिए लोगों को रोका भी जा सकता है।
हेलमेट पर देनी होती है इतनी GST
हेलमेट पर वर्तमान जीएसटी दर 18% है, जबकि यह जीवन रक्षक उपकरण है। कपिला ने कहा, "आईआरएफ हेलमेट पर जीएसटी न लगाने की जोरदार सिफारिश करता है।" इस प्रस्ताव का उद्देश्य मानक हेलमेट को किफायती बनाना और सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है। इससे आम जनता जो हेलमेट खरीदेगी उसके पैसे भी बचेंगे।
आईआरएफ के बयान के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं। साथ ही, हेलमेट सस्ता खरीदे के कारण लोगों की जान को खतरा अधिक होता है।
हेलमेट पर जीएसटी की दर कम करने से आम लोगों के लिए हेलमेट खरीदना काफी हद तक किफायती और उनके बजट के अनुसार बना देंगी। इन कारणों के चलते ही यह मांग भारतीय जीएसटी परिषद और वित्त मंत्रालय के सामने रखी गई है।
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