Indian IT Sector का दबदबा खत्म? : एक समय था जब भारतीय IT कंपनियां शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थीं। TCS, Infosys, Wipro और HCL Technologies जैसे दिग्गज सिर्फ IT सेक्टर ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करते थे। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है।

आज भारतीय IT सेक्टर का बाजार पर प्रभाव लगातार कम हो रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या AI भारतीय IT कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी दौर है?
Bloomberg रिपोर्ट: IT कंपनियां सबसे कमजोर
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की पांच सबसे बड़ी IT कंपनियों का Nifty50 में Combined Weight पहली बार 7.6% से नीचे पहुंच गया है।
यह कम से कम 2002 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
एक समय ऐसा था जब 2000 के शुरुआती वर्षों में इन पांच कंपनियों का Nifty50 में संयुक्त वजन 20% से अधिक था। आज यह घटकर 7.6% से भी नीचे आ चुका है।
इसका मतलब सिर्फ शेयरों की कीमतों में गिरावट नहीं है, बल्कि भारतीय बाजार की लीडरशिप में एक बड़ा Structural Shift देखने को मिल रहा है।
AI ने बदल दिया Traditional बिजनेस मॉडल
दशकों तक भारतीय IT कंपनियों की सफलता का आधार Global Outsourcing रहा।
दुनियाभर की कंपनियां Software Development, Maintenance और Technology Services का काम भारत को इसलिए देती थीं क्योंकि यहां लागत कम और दक्षता अधिक थी, लेकिन अब Generative AI इस पूरे मॉडल को बदल रहा है।
जिन प्रोजेक्ट्स के लिए पहले हजारों इंजीनियरों की जरूरत पड़ती थी, उनमें अब AI आधारित Automation तेजी से जगह बना रहा है।
यही वजह है कि निवेशक अब Traditional IT Services की Long-Term Growth को लेकर पहले जितने आश्वस्त नहीं हैं। बाजार अब IT कंपनियों के Valuation को नए नजरिए से देख रहा है।
Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट
इस साल Nifty IT Index लगभग 29% टूट चुका है, जबकि इसी अवधि में व्यापक Nifty50 में लगभग 9% की गिरावट दर्ज की गई है।
इससे साफ है कि IT सेक्टर पर दबाव बाकी बाजार की तुलना में कहीं ज्यादा है।
Passive Investing भी बढ़ा रहा है दबाव
IT सेक्टर की कमजोरी का दूसरा बड़ा कारण Passive Investing है।
जब किसी सेक्टर के शेयर गिरते हैं तो Nifty50 में उसका Weight अपने आप कम होने लगता है।
Weight कम होने के बाद Nifty को ट्रैक करने वाले Index Funds और ETFs को भी उस सेक्टर में कम निवेश करना पड़ता है।
यानी:
- शेयर गिरते हैं।
- Index Weight घटता है।
- Passive Funds की खरीद कम होती है।
- खरीद घटने से शेयरों पर और दबाव बढ़ जाता है।
इस तरह एक तरह का Negative Feedback Loop बन जाता है।
Infosys और TCS की रैंकिंग में भी बड़ी गिरावट
जो Infosys कभी Nifty50 में Weight के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक्स में शामिल था, वह अब 8वें स्थान पर पहुंच गया है।
वहीं TCS अब 13वें स्थान पर आ चुका है।
Technology Sector अब Nifty50 में पांचवें स्थान पर है और इससे आगे अब Financials, Consumer Discretionary, Energy और Industrials सेक्टर निकल चुके हैं।
Infosys 6 साल के निचले स्तर पर
Infosys फिलहाल करीब ₹996 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह लगभग 6 साल का निचला स्तर है। आखिरी बार अक्टूबर 2020 में Infosys ₹1000 से नीचे ट्रेड करता दिखाई दिया था।
इसके अलावा-
- PE Ratio करीब 14
- लगभग 20 वर्षों का सबसे कम Valuation
- Dividend Yield लगभग 4.8%
कम Valuation यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल भविष्य की Growth को लेकर सतर्क हैं।
चार्ट क्या संकेत दे रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार Infosys का चार्ट अभी भी कमजोर दिखाई देता है।
200 महीने का Moving Average लगभग ₹942-950 के बीच है। यदि यह स्तर भी टूटता है तो दबाव और बढ़ सकता है।
बीच-बीच में आने वाली तेजी (Relief Rally) को भी निवेशक बेच रहे हैं, जिससे मजबूत Recovery देखने को नहीं मिल रही।
TCS भी महत्वपूर्ण सपोर्ट पर
देश की सबसे बड़ी IT कंपनी TCS भी फिलहाल अपने 200 महीने के Moving Average के करीब पहुंच चुकी है। यह स्तर आखिरी बार कोविड संकट के दौरान 2020 में देखने को मिला था। इतिहास बताता है कि TCS ने लगभग ₹1300-1400 के स्तर से लंबी तेजी दिखाकर ₹4600 तक का सफर तय किया था। अब निवेशकों की नजर इस सपोर्ट लेवल पर बनी हुई है।
पूरे IT सेक्टर में कमजोरी
सिर्फ TCS और Infosys ही नहीं, बल्कि लगभग सभी बड़े IT शेयर दबाव में हैं। इनमें शामिल हैं-
- TCS
- Infosys
- Wipro
- HCL Technologies
- Tech Mahindra
Midcap IT कंपनियों में भी कमजोरी बनी हुई है।
हालांकि Coforge और Persistent Systems ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन हालिया गिरावट का असर इन कंपनियों पर भी दिखाई देने लगा है।
क्या IT सेक्टर में निवेश का समय आ गया है?
भारतीय IT उद्योग आज भी देश के सबसे बड़े Export Sectors में शामिल है।
यह सेक्टर-
- अरबों डॉलर की विदेशी कमाई करता है।
- लाखों लोगों को रोजगार देता है।
- भारत की Services Economy की रीढ़ माना जाता है।
कंपनियां लगातार AI, Cloud Computing और Digital Transformation में निवेश कर रही हैं।
हालांकि फिलहाल निवेशक यह देखना चाहते हैं कि इन निवेशों का असर कंपनियों की Earnings और Profit Growth में कब दिखाई देता है।
जब तक AI से पैदा हुई चुनौतियों की भरपाई के ठोस संकेत नहीं मिलते, तब तक भारतीय IT सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है।
भारतीय IT सेक्टर का दबदबा खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह साफ है कि बाजार का नेतृत्व बदल रहा है। AI, कमजोर ग्रोथ, घटती वैल्यूएशन और Passive Investing जैसे कारकों ने सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया है।
लॉन्ग टर्म में IT उद्योग की अहमियत बनी रह सकती है, लेकिन निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनियां AI के दौर में अपने बिजनेस मॉडल को कितनी तेजी और सफलता से बदल पाती हैं।
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