15 साल पुराना है वाहन तो री-रजिस्ट्रेशन पर अब करना होगा ज्यादा खर्च, जानिए कितना

नई दिल्ली, मार्च 14। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को छोड़कर, जहां पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों को क्रमशः 15 और 10 वर्षों के बाद अपंजीकृत माना जाता है, 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को रिन्यू कराने पर अप्रैल से आठ गुना अधिक खर्च आएगा। ये फैसला सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लिया है, जो पूरे भारत में लागू होगा। 1 अप्रैल से, सभी 15 वर्षीय कारों के रजिस्ट्रेशन को रिन्यू करने के लिए 5,000 रु का खर्च आएगा। वर्तमान में ये खर्च केवल 600 रु है। वहीं दोपहिया वाहनों के लिए शुल्क 300 रु के बजाय 1,000 रु होगा। आयातित कारों के लिए ये चार्ज 15,000 रु के बजाय 40,000 रु होगा।

देरी करने पर हर महीने लगेगा अतिरिक्त चार्ज

देरी करने पर हर महीने लगेगा अतिरिक्त चार्ज

प्राइवेट व्हीकल के रजिस्ट्रेशन के रिन्यू में यदि आप देरी करने तो आपसे हर महीने 300 रु मासिक का अतिरिक्च चार्ज लिया जाएगा। कमर्शियल वाहनों के लिए यही जुर्माना राशि 500 रुपये प्रति माह होगी। नए नियमों में यह भी नियम शामिल है कि 15 साल से पुराने निजी वाहनों को हर पांच साल में रिन्यू कराने के लिए आवेदन करना होगा।

1.2 करोड़ वाहन होंगे स्क्रैप

1.2 करोड़ वाहन होंगे स्क्रैप

आंकड़ों के अनुसार इस समय एनसीआर सहित पूरे भारत में कम से कम 1.2 करोड़ वाहन स्क्रैपिंग के लायक हैं। पुराने वाहनों को स्क्रैप करने को आसान बनाने के लिए, परिवहन मंत्रालय ने पूरी आवेदन प्रोसेस को देश में कहीं से भी ऑनलाइन फाइल करने की भी अनुमति दे दी है। बता दें कि पुराने ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल वाहनों के फिटनेस टेस्ट का खर्च भी अप्रैल से बढ़ने जा रहा है।

फिटनेस टेस्ट का खर्च

फिटनेस टेस्ट का खर्च

फिटनेस टेस्ट के लिए परिवहन अधिकारी टैक्सियों के लिए 1,000 रु के बजाय 7,000 रु और बसों और ट्रकों के लिए 1,500 रु के बजाय 12,500 रु वसूलेंगे। एक और बात कि कमर्शियल वाहनों के आठ साल से अधिक पुराने होने के बाद उनके लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होगा। एनसीआर में पुराने वाहन नहीं चल सकते हैं।

क्या हैं एनसीआर के लिए नियम

क्या हैं एनसीआर के लिए नियम

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (2015) और सुप्रीम कोर्ट (2018) के कई अलग अलग आदेशों के तहत जो नियम तय किए गए हैं, उनके अनुसार 10 वर्ष से अधिक पुराना कोई भी रजिस्टर्ड डीजल वाहन और 15 वर्ष से अधिक पुराना पेट्रोल वाहन एनसीआर में नहीं चल सकता। ऐसे वाहनों को दिल्ली में चलाना अवैध है। इतना ही नहीं ऐसे वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर पार्क भी नहीं किया जा सकता।

क्या है सरकार का मकसद

क्या है सरकार का मकसद

री-रजिस्ट्रेशन के लिए शुल्क बढ़ा कर केंद्र सरकार को उम्मीद है कि वाहन मालिक अपने वाहनों को स्क्रैप करना और कम प्रदूषण वाले आधुनिक वाहनों को खरीदना पसंद करेंगे। भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है। विशेष रूप से शहरों में। वाहनों का उत्सर्जन तेजी से गंदी हवा के मुख्य कारणों में से एक है। इसलिए पुराने वाहनों को सरकार सड़कों से हटाना चाहती है। यदि आप अपने वाहन को स्क्रैप करने के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपको कुछ दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इनमें पैन कार्ड की कॉपी, वैध आईडी, पता प्रमाण, फोटो आईडी, बैंक खाते का कैंसल चेक और एक अंडरटेकिंग शामिल है।

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