Home Loan : बढ़ने वाला है बोझ, इसलिए बेहतर तरीके से करें EMI पेमेंट के लिए प्लान
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Home Loan Tips : बजट में होम लोन लेने वालों के लिए कोई खास खुशखबरी नहीं रही। इसके बाद बुधवार को आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से उनकी परेशानी और बढ़ेगी। जब आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो बैंक और एनबीएफसी भी अपनी ब्याज दरें बढ़ाती हैं और कर्जदारों के लिए होम लोन महंगा हो जाता है। हालांकि, इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने पहले से ही होम लोन लिया हुआ है। कुछ जानकार मानते हैं कि अब आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का सिलसिला रोक सकता है। मगर ये सारे जानकारों का मानना नहीं है। मगर इतना तय है कि होम लोन लेने वालों पर इसका बोझ पड़ेगा। ऐसे में होम लोन की रीपेमेंट के लिए प्लानिंग जरूरी है।

इस तरह पड़ेगा बोझ

इस तरह पड़ेगा बोझ

रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि से ईएमआई लगभग 2 से 4 फीसदी महंगी हो जाएगी। लोन लेने वालों को या तो अपना लोन चुकाने के लिए अतिरिक्त पैसा देना होगा या लोन की अवधि बढ़ानी होगी। कैल्कुलेशन करें तो 0.25 फीसदी की वृद्धि से पहले 9.25 फीसदी पर 70 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन के लिए ईएमआई 64,111 रुपये थी। लेकिन अब ब्याज दर होगी 9.50 फीसदी और ईएमआई बढ़ कर हो जाएगी 65,249 रु। यानी हर महीने 1,138 रु की अतिरिक्त राशि का भुगतान।

बढ़े हुए बोझ को कैसे करें मैनेज
इसे अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी फाइनेंशियल कंडीशन के लिए सबसे अच्छा क्या है। उदाहरण के लिए, यदि आप साल में एक बार लोम बैलेंस का 5 फीसदी प्री-पेमेंट कर देते हैं, तो 20 वर्ष का लोन 12 वर्षों में चुकाया जा सकता है।

ये है दूसरा तरीका

ये है दूसरा तरीका

दूसरा तरीका यह है कि आप हर महीने अपनी मौजूदा ईएमआई पर 5 फीसदी 10 फीसदी अतिरिक्त राशि का भुगतान करें। या आप हर साल अतिरिक्त 2 से 5 ईएमआई या हर तिमाही में अतिरिक्त ईएमआई का भुगतान कर सकते हैं। इनमें से कोई एक ऑप्शन आपके लिए बेस्ट रहेगा। ये आपको देखना है कि आपके लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर है।

प्रीपेमेंट के साथ अतिरिक्त ईएमआई

प्रीपेमेंट के साथ अतिरिक्त ईएमआई

ऊपर बताए गए उदाहरणों से समझें कि यदि आपका इरादा 20 साल के कर्ज को 10 साल में चुकाने का था, लेकिन दरों में बढ़ोतरी ने आपकी अवधि को 25 साल कर दिया है, तो इस मामले में, सुनिश्चित करें कि अगले 10 वर्षों तक, आप ईएमआई और प्रीपेमेंट के कॉम्बिनेशन के माध्यम से कम से कम 10 फीसदी लोन का भुगतान करें। इससे आप अपने टार्गेट की ओर बढ़ते रहेंगे।

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खर्चों पर करना होगा काबू

खर्चों पर करना होगा काबू

वे होम लोन ले चुके उधारकर्ता जिनकी ईएमआई पिछले वर्ष से अब तक काफी बढ़ गई है, उन्हें अपने फाइनेंस को मैनेज करना होगा ताकि वे बढ़ी हुई ईएमआई भुगतान का बोझ उठा सकें। यदि उधारकर्ता उच्च ईएमआई समय पर अदा करने में असमर्थ रहे, तो इसका नतीजा खराब क्रेडिट स्कोर हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन प्राप्त करना और भी कठिन हो सकता है। इसलिए ऐसा न होने दें।

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