Gold Price Today: इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच आज शनिवार, 6 जून को घरेलू सर्राफा बाजार में गोल्ड- रेट में भारी गिरावट आई है। वहीं आज साप्ताहिक अवकाश होने के चलते घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में ट्रेडिंग बंद है।

भारत में सोने की कीमत (Gold Price Today)
घरेलू सर्राफा बाजार में आज भी सोने की कीमतों में गिरावट आई। भारत में आज 24 कैरेट सोने का भाव 15,273 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 300 रुपये कम है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 14,000 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 275 रुपये कम है। जबकि 18 कैरेट सोने का भाव 11,455 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 225 रुपये कम है।
24 कैरेट सोने का भाव (24k Sone ka bhav)
आज 24 कैरेट सोने का भाव 15,273 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 300 रुपये कम है। वहीं, 24 कैरेट सोने का रेट 1,52,730 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो कल की कीमत से 3000 रुपये कम है।
22k सोने का रेट (22k sone ka rate)
22 कैरेट सोने का भाव 14,000 रुपये प्रति ग्राम है, जो कल की कीमत से 275 रुपये कम है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो कल की कीमत से 2750 रुपये कम है।
MCX पर सोने का रेट
अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX सोने का भाव 949 रुपये या 0.59% गिरकर 1,58,598 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछली बार यह 1,59,547 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। सुबह MCX सोने का भाव 1,217 रुपये या 0.76% गिरकर 1,58,330 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। ग्लोबल मार्केट में, स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग 1% गिरकर 4,450 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई और स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग 2% गिरकर 73 डॉलर प्रति औंस से नीचे चली गई। मौजूदा अनिश्चितता के कारण महंगाई का दबाव बना हुआ है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शांति बातचीत अपने आखिरी चरण में है और हालिया तनाव के बावजूद वे ईरान के साथ बड़े पैमाने पर युद्ध में दोबारा शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता वाले युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों पर संदेह और बढ़ गया। 'ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स' के अनुसार, लंबे समय से चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में लगातार रुकावट के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और ब्याज दरें बढ़ने के जोखिम को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
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