सरकार जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) में अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) आज से खुल गया है। पहले दिन नॉन-रिटेल निवेशक दांव लगा सकेंगे, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए यह मौका कल यानी 17 जून को खुलेगा। सरकार ने इसके लिए 352 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया है। यह फैसला पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा करने के लिए लिया गया है। निवेशकों को मौजूदा मार्केट प्राइस और डिस्काउंट के अंतर पर नजर रखनी चाहिए।
इस सेल में 2 फीसदी का बेस इश्यू रखा गया है, जबकि डिमांड ज्यादा होने पर 3 फीसदी का 'ग्रीनशू ऑप्शन' भी मौजूद है। बाजार में शेयरों की सप्लाई बढ़ने से शॉर्ट टर्म में स्टॉक की कीमतों पर दबाव दिख सकता है। ऐसे में मौजूदा शेयरधारकों को बोली लगाने से पहले कट-ऑफ प्राइस का बारीकी से आकलन करना चाहिए। सही बिडिंग प्राइस चुनने से शेयर अलॉटमेंट की संभावना बढ़ जाती है।

PSU इंश्योरेंस शेयरों पर GIC Re OFS का असर
ट्रेडर्स को आज GIC Re के साथ-साथ 'द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी' (NIACL) पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए। अक्सर देखा गया है कि ऐसे बड़े कॉर्पोरेट एक्शन के दौरान ये दोनों शेयर एक जैसी चाल चलते हैं। GIC Re के लिए 352 रुपये का फ्लोर प्राइस एक मजबूत सपोर्ट लेवल का काम कर सकता है। आज ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए मार्केट एक्सपर्ट्स इंट्राडे पोजीशन के लिए सख्त स्टॉप-लॉस लगाने की सलाह दे रहे हैं।
| OFS कैटेगरी | जरूरी जानकारी और आंकड़े |
|---|---|
| बेस इश्यू साइज | कुल इक्विटी का 2 प्रतिशत |
| ग्रीनशू ऑप्शन | 3 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी |
| फ्लोर प्राइस | ₹352 प्रति इक्विटी शेयर |
| रिटेल बिडिंग की तारीख | 17 जून, 2026 |
GIC Re OFS: बिडिंग गाइड और किन जोखिमों का रखें ध्यान
सरकारी कंपनियों के ऐसे विनिवेश (divestment) में रिटेल निवेशकों के लिए आमतौर पर 10 फीसदी हिस्सा रिजर्व रहता है। आप अपने ब्रोकर सॉफ्टवेयर के OFS सेक्शन में जाकर आसानी से बोली लगा सकते हैं। हालांकि, ध्यान रहे कि ज्यादा डिमांड (oversubscription) होने पर छोटे निवेशकों को कम शेयर मिलने का रिस्क रहता है। OFS के बाद शेयरों की बढ़ी हुई सप्लाई के कारण स्टॉक कुछ हफ्तों तक एक सीमित दायरे में रह सकता है। आज के इंस्टीट्यूशनल बिडिंग सेशन से मिलने वाले 'क्लियरिंग प्राइस' के संकेतों पर नजर रखना फायदेमंद होगा।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए फ्लोर प्राइस पर नई एंट्री करना एक अच्छा मौका हो सकता है। हालांकि, शेयर की भविष्य की चाल ग्लोबल मार्केट और घरेलू संकेतों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, इंश्योरेंस सेक्टर में होने वाले सुधार भी इन सरकारी कंपनियों के लॉन्ग-टर्म आउटलुक को प्रभावित करेंगे। बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी बड़े निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह जरूर लें। विनिवेश के इस दौर में जोखिम को मैनेज करने के लिए यह अनुशासित तरीका सबसे बेहतर है।
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