Petrol and Diesel prices: मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीदों के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग चार महीनों के निचले स्तर पर आ गई हैं। बुधवार सुबह 8 बजे तक, ब्रेंट क्रूड 76.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 72.69 डॉलर प्रति बैरल पर था। इस तरह पिछले दो सेशन में देखी गई गिरावट जारी रही।

कच्चे तेल की कीमतों में यह भारी गिरावट तब आई है, जब इस महीने की शुरुआत में ईरान से जुड़े टकराव के कारण कीमतों में कुछ समय के लिए उछाल आया था। डर यह था कि इस टकराव से दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल की सप्लाई में रुकावट आ सकती है। अब वे चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं, जिससे तेल की कीमतें नीचे आ गई हैं।
लेकिन आम लोगों के मन में अभी एक सवाल है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट आ सकती है?
क्या अब पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे?
कच्चे तेल की कम कीमतें आम तौर पर भारत के लिए अच्छी होती हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। सस्ता तेल देश के आयात बिल को कम करने, रुपये को सहारा देने और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद करता है।
हालांकि, जो ग्राहक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें शायद इंतजार करना पड़ सकता है। भारत में ईंधन की कीमतें कच्चे तेल की कीमतों, टैक्स, रिफाइनिंग मार्जिन और मार्केटिंग लागत से तय होती हैं।
फिलहाल, बाजार के लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात सामान्य होते रहेंगे। अगर आने वाले हफ्तों में ईरान और खाड़ी देशों से और ज्यादा कच्चा तेल बाजार में आता है और वैश्विक मांग कम बनी रहती है, तो जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें दबाव में रह सकती हैं और और भी निचले स्तर तक जा सकती हैं।


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