Income Tax : पिछले 5 साल की रिटर्न फाइल करने का मिला मौका, ऐसे उठाएं फायदा

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने टैक्सपेयर्स को बड़ा मौका दिया है। सीबीडीटी ने कहा है कि जिन लोगों ने पिछले 5 सालों से इलेक्ट्रॉनिक रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है, लेकिन अभी तक उसका वेरिफिकेशन नहीं किया है। उन्हें एक अवसर दिया जा रहा है। टैक्स पेयर्स इलेक्ट्रॉनिक फिजिकल तौर पर अपने हस्ताक्षर की कॉपी इनकम टैक्स को भेज कर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जारी किया सर्कुलर

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जारी किया सर्कुलर

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा है कि जिन टैक्सपेयर्स ने साल 2015-16 से 2019-20 तक इलेक्ट्रॉनिक रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है और अभी तक उसका वेरिफिकेशन नहीं किया है। अब वह लोग हस्ताक्षर करके इनकम टैक्स विभाग को हार्ड कॉपी यानी उसकी प्रिंटिड कॉपी भेज सकते हैं। वहीं अगर लोग चाहें तो किसी 5 इलेक्टॉनिक मैथेड (विधि) से वेरिफाई भी कर सकते हैं।

वेरिफिकेशन के बाद ही आईटीआर होता है प्रोसेस

वेरिफिकेशन के बाद ही आईटीआर होता है प्रोसेस

दरअसल इलेक्टॉनिक रूप से जब रिटर्न फाइल करते हैं तो उसमें हस्ताक्षर नहीं होते हैं। लिहाजा टैक्सपेयर्स को किसी अन्य तरीके से वेरिफिकेशन करना जरूरी होता है। ताकि ये पता चले कि जो आपने जानकारी दी है वो सही है। एक बार वेरिफिकेशन होने के बाद ही रिटर्न क्लेम के लिए प्रॉसेस किया जाता है।

ये है सर्कुलर

ये है सर्कुलर

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने सर्कुलर में कहा है कि अधूरे रिटर्न फॉर्म्स को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वेरिफाई किया जा सकता है। इसके लिए आधार लिंक्ड मोबाइल फोन पर पासवर्ड लेकर, नेट बैंकिंग या बैंक अकाउंट नंबर के जरिए टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉग इन करके डीमैट नंबर के जरिए या फिर एटीएम द्वारा कैश डिस्पेंसर्स की मदद से इसे वेरिफाई किया जा सकता है। 

वैसे मिलता है 4 माह का समय

वैसे मिलता है 4 माह का समय

टैक्स पेयर्स को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिटर्न फाइल करने पर 4 महीने का समय दिया जाता है। इस दौरान वह अपना आईटीआर वेरिफाई कर सकते हैं। अगर वेरिफाई नहीं किया तो कानून यह कहता है कि अथॉरिटी के टैक्सपेयर्स के खिलाफ दायित्व पूरा नहीं करने के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। सीबीडीटी ने कहा कि अतिरिक्त समय दिया जा रहा है। कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स की वजह से वेरिफकेशन प्रॉसेस में देरी की गई है। इस तरह को रिटर्न्स को वेरिफाई करने और ऐसे रिटर्न्स को रेगुलराइज करने के लिए एक बार फिर से मौका दिया जा रहा है।

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