TRAI Voice SMS Plan: क्या आपके घर में भी कोई ऐसा है जो सिर्फ मोबाइल पर ही कॉल करता है? न WhatsApp चलाता है, न YouTube देखता है, न रोज इंटरनेट इस्तेमाल करता है। फिर भी हर बार रिचार्ज कराते समय उसे डेटा वाला महंगा प्लान खरीदना पड़ता है। अब लाखों लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही सस्ते Voice और SMS वाले अलग रिचार्ज प्लान मिलेंगे। लेकिन इस उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। देश की तीन बड़ी टेलीकॉम कंपनियों Jio, Airtel और Vodafone Idea (Vi) ने ऐसे सस्ते प्लान लाने के प्रस्ताव का विरोध कर दिया है। आखिर मामला क्या है? कौन सही है? और इसका सीधा असर आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

पूरा मामला क्या है-
TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) ने एक प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव यह था कि टेलीकॉम कंपनियां ऐसे रिचार्ज प्लान भी दें जिनमें सिर्फ: Voice Calling, SMS हो और डेटा बिल्कुल न हो। यानी जो लोग इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें डेटा के पैसे न देने पड़ें। खासकर:
बुजुर्ग लोग
ग्रामीण इलाकों के ग्राहक
फीचर फोन यूजर
कम आय वाले परिवार
TRAI ऐसा क्यों चाहता है? TRAI को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बाजार में ज्यादातर प्लान डेटा के साथ ही आते हैं। मान लीजिए किसी बुजुर्ग व्यक्ति को सिर्फ कॉल करनी है। उसे इंटरनेट की जरूरत नहीं है। फिर भी उसे वही प्लान खरीदना पड़ता है जिसमें डेटा भी शामिल है। TRAI का कहना है कि ग्राहक को अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प मिलना चाहिए। अगर कोई सिर्फ कॉल और SMS चाहता है तो उसे वही सुविधा सस्ते दाम में मिलनी चाहिए।
टेलीकॉम कंपनियों ने विरोध क्यों किया?
1. Jio का कहना है आज का नेटवर्क डेटा पर चलता है Jio का कहना है कि 4G और 5G नेटवर्क पूरी तरह IP आधारित हैं। सरल भाषा में समझें तो आज की Voice Calling भी डेटा नेटवर्क के जरिए ही चलती है।कंपनियों का तर्क है कि जब पूरी तकनीक डेटा नेटवर्क पर आधारित है, तब डेटा को पूरी तरह अलग करके सस्ते Voice-only प्लान बनाना व्यावहारिक नहीं है।
2. साइबर फ्रॉड बढ़ सकता है Jio ने एक और बड़ी चिंता जताई है। कंपनी का कहना है कि अगर बहुत सस्ते और कम वैलिडिटी वाले Voice-SMS प्लान आए, तो साइबर ठग बड़ी संख्या में ऐसे सिम खरीद सकते हैं। इनका इस्तेमाल फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड, स्पैम कॉल, ऑनलाइन ठगी, के लिए किया जा सकता है। इससे धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
3. Airtel का तर्क Airtel का कहना है कि भारत तेजी से डिजिटल इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। सरकारी सेवाएं, बैंकिंग, UPI, हेल्थ सर्विस, शिक्षा-सब कुछ मोबाइल डेटा पर आधारित है। अगर लोगों को Voice-only प्लान की तरफ बढ़ावा दिया गया तो कुछ लोग डिजिटल दुनिया से पीछे रह सकते हैं।
4. Vi की चिंता Vodafone Idea का कहना है कि आज कई मोबाइल ऐप और सिस्टम बैकग्राउंड में थोड़ा-बहुत डेटा इस्तेमाल करते रहते हैं। अगर किसी ग्राहक के पास डेटा नहीं होगा तो उसे अनजाने में अतिरिक्त चार्ज लग सकते हैं। इससे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है।
उपभोक्ता संगठन क्या कह रहे हैं? उपभोक्ता अधिकार समूहों की राय बिल्कुल अलग है।
उनका कहना है कि:
हर व्यक्ति को डेटा की जरूरत नहीं होती।
कई गांवों और पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट ठीक से चलता भी नहीं।
फिर भी लोगों को डेटा वाला महंगा रिचार्ज खरीदना पड़ता है।
यह ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
सबसे ज्यादा असर किन लोगों पर पड़ेगा- यह मुद्दा सबसे ज्यादा इन लोगों से जुड़ा है जिनको कॉल की जरूरत है बस इंटरनेट चलना नहीं आता है जिसमे आते है बुजुर्ग लोग जो सिर्फ परिवार से बात करने के लिए मोबाइल रखते हैं। फीचर फोन यूजर जिनके फोन में इंटरनेट की सुविधा ही नहीं होती। ग्रामीण भारत जहां कई जगह डेटा नेटवर्क कमजोर है।दूसरा नंबर रखने वाले लोग जो सिर्फ OTP या कॉल के लिए सिम चालू रखते हैं। इन सभी लोगों को उम्मीद थी कि रिचार्ज का खर्च कम होगा।
क्या अभी ऐसे प्लान मौजूद हैं? हाँ, कुछ Voice और SMS आधारित प्लान पहले से मौजूद हैं। लेकिन TRAI का कहना है कि उनकी संख्या बहुत कम है और अधिकतर लंबी वैलिडिटी वाले प्लान हैं। यही वजह है कि TRAI हर वैलिडिटी अवधि में Voice-SMS विकल्प उपलब्ध कराना चाहता था।
अब आगे क्या होगा? फिलहाल मामला TRAI और टेलीकॉम कंपनियों के बीच चर्चा के दौर में है। TRAI ने उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देने की बात कही है, जबकि टेलीकॉम कंपनियां इसे तकनीकी, कारोबारी और सुरक्षा कारणों से सही नहीं मान रही हैं। अंतिम फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि भविष्य में ग्राहकों को सस्ते Voice-SMS प्लान मिलेंगे या नहीं।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या ग्राहक को सिर्फ वही सेवा खरीदने का अधिकार होना चाहिए जिसकी उसे जरूरत है? एक तरफ टेलीकॉम कंपनियां कह रही हैं कि आज का नेटवर्क डेटा-केंद्रित हो चुका है और Voice-only प्लान व्यावहारिक नहीं हैं। दूसरी तरफ लाखों ऐसे ग्राहक हैं जो आज भी सिर्फ कॉल और SMS के लिए मोबाइल इस्तेमाल करते हैं और उन्हें लगता है कि वे ऐसी सेवा के लिए पैसे दे रहे हैं जिसका वे उपयोग ही नहीं करते। अब सबकी नजर TRAI के अगले कदम पर है, क्योंकि इसका असर सीधे करोड़ों मोबाइल यूजर्स की जेब पर पड़ सकता है।
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