RBI Guidelines For Payment Aggregators : डिजिटल पेमेंट का प्रचलन बढ़ने के साथ कई कंपनियां इस सेक्टर में अपना कारोबार शुरु कर चुकी हैं, लेकिन कुछ कंपनियां बिना लाइसेंस के अपना बिजनेस को ऑपरेट कर रही हैं। ऐसे में किसी प्रकार के धोखाधड़ी होने पर यूज़र्स को कई तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लिहाजा अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए परिचालन हेतु पहले से लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है।

इसका सीधा मतलब है कि अब कोई भी कंपनी जो पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर काम कर रही हैं उसे लाइसेंस लेना जरूरी है। ऐसी कंपनियों के लिए नए नियम लागू करते हुए बैंकिंग नियामक ने यह अनिवार्य किया है कि पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए एलिजिब्लिटी प्राप्त करने हेतु कंपनियों की तीन वर्षों के भीतर न्यूनतम नेटवर्थ 25 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
कब तक लाइसेंस हासिल करना जरूरी?
आरबीआई के नए गाइडलाइंस के मुताबिक, पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की आवश्यकता बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह वर्तमान सीमा से 10 करोड़ रुपये अधिक है। वर्तमान में न्यूनतम आवश्यकता 15 करोड़ रुपये है। RBI के अनुसार, ऐसे व्यवसायों में लगे लोगों को 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से अपने आवेदन जमा करने होंगे।
RBI ने भुगतान एग्रीगेटर्स के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि नए नियमों का पालन न करने पर क्या होगा? तो चलिए यह भी जान लेते हैं...
RBI द्वारा पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए जारी दिशानिर्देश के अनुसार, इस संबंध में किसी भी तरह के उल्लंघन पर 28 फरवरी, 2026 तक बैंक यानी कंपनी को बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने सीमा पार लेनदेन के लिए 25 लाख रुपये की सीमा निर्धारित की है। यानी नए नियमों के अनुसार, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके इनवार्ड और आउटवार्ड मनी ट्रांसफर 25 लाख रुपये की लेनदेन सीमा के अधीन होगा। नियामक के अनुसार, इस सीमा से अधिक के किसी भी लेनदेन को एस्क्रो खातों में सुरक्षित रखा जाएगा।
इसकेअलावा RBI ने यूज़र्स के हितों की रक्षा के लिए पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए वार्षिक साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना भी अनिवार्य कर दिया है।
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