China GDP Growth 2022 के बाद सबसे धीमी, Japan जैसी आर्थिक सुस्ती की ओर बढ़ रहा!

China GDP Growth: क्या दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी Economy अब लंबे संकट की तरफ बढ़ रही है?क्या चीन... जापान की तरह "Lost Decades" वाले दौर में फंस सकता है? र अगर ऐसा हुआ... तो इसका असर सिर्फ चीन तक नहीं रहेगा... बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की Economy पर भी पड़ सकता है, चीन की नई GDP रिपोर्ट ने दुनियाभर के निवेशकों और एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। चीन की Economy में ऐसा क्या हो रहा है और दुनिया के लिए इसका क्या मतलब है आइए समझते हैं।

China

चीन की GDP उम्मीद से कमजोर

सबसे पहले बात करते हैं ताजा आंकड़ों की। चीन की Economy इस Financial Year की दूसरी तिमाही में सिर्फ 4.3% की रफ्तार से बढ़ी है। ये 2022 की चौथी तिमाही के बाद सबसे धीमी Growth है। दिलचस्प बात ये है कि चीन सरकार और मार्केट को उम्मीद थी कि GDP Growth 4.5% से 5% के बीच रहेगी लेकिन असली आंकड़ा इससे भी नीचे निकल गया, यानी चीन की Economy उम्मीद से ज्यादा कमजोर दिखाई दे रही है।

पहली छमाही के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे

अगर पूरे साल की पहली छमाही की बात करें तो पहली तिमाही में GDP Growth 5% रही थी लेकिन दूसरी तिमाही कमजोर रहने की वजह से पहले 6 महीनों की औसत Growth घटकर 4.7% रह गई। यानी साल की शुरुआत अच्छी थी लेकिन जैसे-जैसे समय बीता Economy की रफ्तार लगातार धीमी होती गई।

Investment में बड़ी गिरावट

चिंता सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है, चीन में Fixed Asset Investment भी तेजी से गिर रहा है। पहली छमाही में इसमें 5.7% की गिरावट दर्ज हुई, जबकि पहले पांच महीनों में गिरावट 4.1% थी। यानी निवेश लगातार कमजोर होता जा रहा है, और जब Investment घटता है तो नई फैक्ट्रियां, नए प्रोजेक्ट और नए रोजगार भी प्रभावित होते हैं।

Property Sector से झटका

चीन की सबसे बड़ी परेशानी उसका Property Sector बना हुआ है। पहली छमाही में Property Investment में 18% की भारी गिरावट आई है, और सबसे चौंकाने वाली बात, ये गिरावट 1992 के बाद सबसे बड़ी मानी जा रही है। यानी तीन दशक से ज्यादा समय में पहली बार Property Sector इतनी बड़ी मुश्किल में है। जबकि चीन की Economy कई सालों तक Real Estate सेक्टर पर काफी हद तक टिकी रही है।

लोग खर्च भी कम कर रहे

एक और चिंता की बात लोगों की खरीदारी भी कमजोर पड़ रही है, हालांकि जून में Retail Sales में करीब 1% की बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन Auto Sales में 16% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। यानी लोग बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। जब Consumer Confidence कमजोर होता है तो Economy की Growth पर सीधा असर पड़ता है।

जापान के रास्ते पर बढ़ रहा China?

आर्थिक विशेषज्ञ अब चीन की तुलना जापान से करने लगे हैं। 1990 के दशक में जापान भी तेज आर्थिक विकास के दौर में था, लेकिन प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में बुलबुला फूटने के बाद देश कई वर्षों तक धीमी ग्रोथ और आर्थिक सुस्ती में फंसा रहा।

चीन में भी इस समय प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी, घटता निवेश, कमजोर उपभोक्ता मांग और धीमी आर्थिक वृद्धि जैसी स्थितियां दिखाई दे रही हैं। यही वजह है कि कई विश्लेषकों को आशंका है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो चीन भी लंबे समय तक आर्थिक सुस्ती का सामना कर सकता है।

Global Economy पर असर

पिछले दो दशकों में चीन वैश्विक आर्थिक विकास का सबसे बड़ा इंजन रहा है। ऐसे में अगर चीन की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक कमजोर रहती है तो इसका असर दुनिया भर पर दिखाई दे सकता है।

कमोडिटी की मांग घट सकती है, वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है और कई देशों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे देशों पर भी इसका असर ग्लोबल ट्रेड, मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन और बाजार की धारणा के जरिए देखने को मिल सकता है।

चीन की ताजा GDP रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि देश की अर्थव्यवस्था अभी भी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी, निवेश में गिरावट और कमजोर उपभोक्ता मांग चीन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार के प्रोत्साहन उपाय अर्थव्यवस्था को नई गति दे पाते हैं या नहीं। क्योंकि चीन की आर्थिक सेहत का असर सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

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