BSE Sensex Outlook: पिछले दो सालों में भारतीय शेयर बाजार से कोई खास रिटर्न नहीं मिला है, लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि अगले 12 महीनों में बेंचमार्क BSE सेंसेक्स के 1,00,000 के स्तर तक पहुंचने की 25% संभावना है। एक रिपोर्ट में, मॉर्गन स्टेनली के इंडिया इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिधम देसाई ने आने वाले साल के लिए बाज़ार के तीन संभावित नतीजों का जिक्र किया है- 'बुल केस' (तेजी की स्थिति) के लिए 25% संभावना, 'बेस केस' (सामान्य स्थिति) के लिए 50% संभावना और 'बेयर केस' (मंदी की स्थिति) के लिए 25% संभावना।

सेंसेक्स 1,00,000 का पार कब जाएगा?
अपने 'बुलिश' अनुमान के तहत, मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि सेंसेक्स 1,00,000 के स्तर तक पहुंच जाएगा। इसके लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहना, भारत के 'टर्म्स ऑफ ट्रेड' (व्यापार की शर्तें) में सुधार और रिफ्लेशनरी नीतियों (अर्थव्यवस्था को गति देने वाली नीतियां) से मजबूत आर्थिक विकास जैसे कारक मददगार साबित होंगे। ब्रोकरेज का यह भी अनुमान है कि इस स्थिति में FY26-FY29 के दौरान सेंसेक्स की कमाई 19% की सालाना दर से बढ़ेगी।
सेंसेक्स का 89,000 का लक्ष्य
मॉर्गन स्टेनली ने अपने 'बेस केस' (मुख्य अनुमान) के लिए 50% संभावना जताई है, जिसके तहत अगले 12 महीनों में सेंसेक्स 89,000 के स्तर तक पहुंच सकता है। यह अनुमान मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता बने रहने, प्राइवेट सेक्टर के निवेश में लगातार तेजी और वास्तविक आर्थिक विकास दर व वास्तविक ब्याज दरों के बीच अनुकूल अंतर पर आधारित है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2029 तक सेंसेक्स की कमाई 16% की सालाना कंपाउंडेड दर से बढ़ेगी।
क्या सेंसेक्स 66,000 पर जाएगा?
अपने डाउनसाइड सिनेरियो में मॉर्गन स्टेनली ने बताया है कि सेंसेक्स को डाउनसाइड जाने की 25% संभावना है, मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि अगले साल सेंसेक्स गिरकर 66,000 तक पहुंच जाएगा।
अगली मार्केट रैली की वजह क्या हो सकती है?
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारतीय शेयर बाज़ार के लिए मुख्य वजह यह होगी कि निवेशक ग्लोबल इकॉनमी के मुकाबले भारत की ग्रोथ में अंतर को कैसे देखते हैं। ब्रोकरेज के अनुसार, यह सोच तब बेहतर हो सकती है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाले कैपिटल खर्च को लेकर ग्लोबल सेंटीमेंट कमजोर पड़े या भारत की आर्थिक ग्रोथ तेज हो। रिपोर्ट में कहा गया है, "इसलिए, आने वाले तिमाही नतीजों के सीजन से काम के संकेत मिलने चाहिए, और मजबूत हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स को देखते हुए हमें उम्मीद है कि नतीजे उम्मीद से बेहतर हो सकते हैं।"
मॉर्गन स्टेनली का यह भी मानना है कि भारत में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म हो रहे हैं, जिनसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के आने के लिए नियम-कानून काफी आसान हो सकते हैं। शुरुआती पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की अच्छी पाइपलाइन बाजार को और सहारा दे सकती है, बशर्ते बहुत ज्यादा IPO न लाए जाएं।


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