लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद से बीजेपी के 'अच्छे दिन' आ गए है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी की संपत्ति में 81.18 प्रतिशत तक बढ़ गई है। एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि, बीजेपी की आमदनी बढ़कर 1,034.27 करोड़ रुपए दर्ज की गई है। दिलचस्प बात ये है कि इसी दौरान कांग्रेस की आय में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कांग्रेस की कुल संपत्ति घटकर 225.36 करोड़ रुपए हो गई है।
चुनाव आयोग से लिए गए हैं आंकड़े
ये आंकड़े मंगलवार एडीआर ने जारी किए हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, सात राष्ट्रीय दलों भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तृणमूल कांग्रेस की कुल घोषित आय 1,559.17 करोड़ रुपए रही, जबकि इन पार्टियों ने 1,228.26 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ये रिपोर्ट चुनाव आयोग में दाखिल विवरणों पर आधारित इस ली गई है। इस रिपोर्ट में भाजपा और कांग्रेस की कुल आय, उनके व्यय और आय के स्रोत की तुलना की गई है।
बीजेपी की संपत्ति बढ़ी, कांग्रेस की संपत्ति घटी
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2015-16 से 2016-17 के बीच भाजपा की आय 570.86 करोड़ रुपए से 81.18 फीसदी बढ़कर 1034.27 करोड़ रुपए हो गई है। बीजेपी की आय में 463.41 करोड़ की बढ़त दर्ज की गई है। वहीं कांग्रेस की आय 261.56 करोड़ रुपए से 14 फीसदी से घटकर 225.36 करोड़ रुपए रह गई। कांग्रेस की आय में 36.20 करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई है।
कितना किया खर्च?
भाजपा ने 2016-17 में 710.057 करोड़ रुपए का खर्च बताया। इस दौरान कांग्रेस ने 321.66 करोड़ रुपए खर्च किए, जो उसकी इस दौरान की कुल आय से 96.30 करोड़ रुपए अधिक है। दोनों पार्टियों ने चंदा या दान को अपनी आय के प्रमुख तीन स्रोत में से एक बताया।
कांग्रेस कूपन, बीजेपी चंदे के भरोसे
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने 2016-17 के दौरान 997.12 करोड़ रुपए की आय का स्रोत अनुदान, चंदा या आर्थिक सहयोग बताया। यह राशि भाजपा की कुल आय का 96.41 फीसदी है। कांग्रेस की सर्वाधिक कमाई 115.644 करोड़ रुपए उसके द्वारा जारी किए गए कूपनों से हुई है। यह उसकी कुल कमाई का 51.32 फीसदी है।
ब्याज से करोड़ो की कमाई
रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख 7 राष्ट्रीय दलों ने 2016-17 में बैंकों से ब्याज के रूप में 128.60 करोड़ रुपये प्राप्त किए। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों को अपनी आय-व्यय का विवरण दर्ज करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर थी, लेकिन भाजपा ने अपना लेखा-जोखा आठ फरवरी और कांग्रेस ने 19 मार्च को दर्ज कराया।
पार्टियां देर से जमा कर रही हैं रिपोर्ट
एडीआर ने कहा है कि भाजपा, कांग्रेस, राकांपा, भाकपा पिछले पांच सालों से लगातार अपना लेखा-जोखा देर से जमा कर रही हैं। चुनाव और लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों से 'सूचना का अधिकार' अधिनियम के तहत उनके वित्तीय लेन-देन का विवरण मांगा गया था।
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