शेल कंपनियों की सूची में डाले जाने के खिलाफ कई कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंजों में अपील की है। इन कंपनियों ने अपनी अपील के साथ सालाना रिर्पोट और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी लगाए हैं।
शेल कंपनियों की सूची में डाले जाने के खिलाफ कई कंपनियों ने स्टॉक एक्सचेंजों में अपील की है। इन कंपनियों ने अपनी अपील के साथ सालाना रिर्पोट और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी लगाए हैं। इनका कहना है कि वे मुखौटा कंपनियां नहीं हैं बल्कि सभी नियमों का अनुपालन कर रही हैं और कामकाज करती हैं। आपको बता दें कि शेयर और कमोडिटी बाजार नियामक सेबी से सोमवार को 331 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरु करने का निर्देश स्टॉक एक्सचेंजों को दिया था।
इन कंपनियों ने एक्सचेंज से की अपील
शेयर बाजारों में अपील करने वाली कंपनियों में तमिलनाडु की लोटस आई हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट लिमिटेड, डीबी इंटरनेशनल स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड और पार्श्रनाथ डेवलपर्स शामिल हैं।
शेयर बाजार में बंद हुई ट्रेडिंग
जिन कंपनियों के खिलाफ सेबी की तरफ से निर्देश जारी हुए हैं वह सभी संदिग्ध कंपनियां सूचीबद्ध हैं और उनके शेयर इस महीने कारोबार के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
ये हैं कंपनियां
इन 331 कंपनियों में से 162 लिस्टेड कंपनियां शामिल हैं। गैलेंट इस्पात, जे कुमार इंफ्रा, पिनकॉन स्पिरिट, पार्शनाथ डेवलपर्स, प्रकाश इंडस्ट्रीज, एसक्यूएस बीएफएसआई, रोहित फेरो, आरईआई एग्रो और असम कंपनी आदि शामिल हैं।
क्या होती हैं शेल कंपनियां
एक्सपर्ट के मुताबिक शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन सामान्य कंपनियों की तरह होता है। सामान्य कंपनियों की तरह इनमें डायरेक्टर्स होते हैं। साथ ही रिटर्न भी फाइल किया जाता है। इन कंपनियों का मालिक कोई भी हो, लेकिन ये दूसरों के काम आती है।
नियमित तौर पर नहीं करती हैं कोई बिजनेस
शेल कंपनियों में कोई खास कैपिटल नहीं होती है और न वे नियमित तौर पर कोई बिजनेस करती हैं। आमतौर पर इन कंपनियों में शेयरों का लेनदेन होता है और इसके जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट किया जाता है। नोटबंदी के दौरान भी बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों के जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट किया गया।
ब्लैकमनी को व्हाइट बनाने में करते हैं मदद
इन कंपनियों का इस्तेमाल मुख्य रुप से ब्लैकमनी को कम से कम खर्च में व्हाइट बनाने में किया जाता है। इन कंपनियों में टैक्स को पूरी तरह से बचाने या कम से कम रखने की व्यवस्था होती है। इसमें पूरे पैसे को एक्सपेंस के तौर पर दिखाया जाता है। जिससे टैक्स भी नहीं लगता है।
सिर्फ कागजों पर चलता है कारोबार
ऑपरेशन की बात करें तो इन कंपनियों में किसी तरह का कोई काम नहीं होता, सिर्फ कागजों पर एंट्रीज दर्ज की जाती है। सरल शब्दों में कहें तो यह कागजों पर बनी कंपनी होती हैं।
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