MSME : मिल गया 1 लाख करोड़ रु से ज्यादा का लोन, मगर दिक्कतें नहीं हो रहीं कम

नयी दिल्ली। एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर को कोरोना संकट के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लॉकडाउन के दौरान एमएसएमई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ। मगर लॉकडाउन में दी गई राहत के बाद धीरे-धीरे एमएसएमई सेक्टर पटरी पर लौट रहा है। हाल ही में एक सर्वे में सामने आया है कि जून और जुलाई में 13 प्रतिशत के मुकाबले 1 अगस्त को केवल 9 प्रतिशत इकाइयां बंद हैं। एमएसएमई इकाइयों पर महामारी के प्रभाव का आकलन करने के लिए 9 से 14 अगस्त के बीच एमएसएमई मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसी राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम ने 5,774 इकाइयों का सर्वे किया। सर्वे में सामने आया है कि एमएसएमई सेक्टर के लिए अभी भी कई दिक्कतें हैं।

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लिक्विडिटी बनी हुई है समस्या
सर्वे के अनुसार सरकार द्वारा किए गए 3 लाख करोड़ रुपये की स्कीम जैसे उपायों के बावजूद एमएसएमई के लिए लिक्विडिटी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जबकि इस 3 लाख करोड़ रु की स्कीम में से 1 लाख करोड़ रु का लोन बांटा जा चुका है। अन्य बड़े मुद्दों में नए ऑर्डर की कमी, लॉजिस्टिक समस्याएं और कच्चे माल और श्रम की उपलब्धता शामिल है। इतना ही नहीं राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में ढील के बावजूद राज्यों की तरफ से लगाए गए आंतरिक लॉकडाउन ने फर्मों द्वारा कई विनिर्माण इकाइयों को फिर से शुरू करने की योजना को प्रभावित किया है।

ये है राहत की बात
सर्व में एक राहत की बात भी सामने आई है। अच्छी खबर यह है कि इकाइयों के लिए क्षमता उपयोग में धीरे-धीरे सुधार शुरू हो गया है। एक-चौथाई ने अपनी स्थापित क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक का उपयोग शुरू कर दिया है। वहीं जुलाई में अपनी क्षमता के आधे से अधिक का उपयोग करने वाली इकाइयां केवल 20 फीसदी थी। ये सर्वे एमएसएमई मंत्रालय द्वारा घरेलू मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष पेश किया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति एमएसएमई सहित विभिन्न क्षेत्रों पर कोरोना के प्रभाव की समीक्षा कर रही थी।

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