विप्रो का 15,000 करोड़ रुपये का मेगा शेयर बायबैक प्रोग्राम 17 जून तक खुला है। कंपनी 445 रुपये प्रति शेयर के प्रीमियम भाव पर शेयर वापस खरीद रही है। खास बात यह है कि रिकॉर्ड डेट पर 2 लाख रुपये से कम के शेयर रखने वाले छोटे निवेशकों को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है। बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए यह मुनाफे के साथ बाहर निकलने का एक शानदार मौका है।
इस टेंडर ऑफर में हिस्सा लेने से पहले निवेशकों को अपना 'एंटाइटेलमेंट रेशियो' (entitlement ratio) जरूर चेक कर लेना चाहिए। इसकी जानकारी आपको रजिस्ट्रार की वेबसाइट या अपने स्टॉक ब्रोकर पोर्टल पर मिल जाएगी। आमतौर पर छोटे निवेशकों के लिए एक्सेप्टेंस रेशियो जनरल कैटेगरी के मुकाबले ज्यादा होता है। इससे रिटेल निवेशकों के शेयर स्वीकार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

विप्रो बायबैक: ऐसे चेक करें अपना एंटाइटेलमेंट रेशियो
बायबैक में शामिल होने के लिए आप ASBA (Application Supported by Blocked Amount) सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। ज्यादातर बड़े बैंकों की वेबसाइट पर यह सुविधा आसानी से मिल जाती है। ध्यान रहे कि अपने ब्रोकर द्वारा तय किए गए डेली कट-ऑफ टाइम से पहले ही आवेदन कर दें। 17 जून की आखिरी तारीख का इंतजार करने से तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, जिससे आपका आवेदन अटक सकता है।
| अवधि | विप्रो का रिटर्न | बैंक FD का रिटर्न |
|---|---|---|
| 5 साल | ~12% CAGR | ~6.5% CAGR |
| 10 साल | ~10% CAGR | ~7.2% CAGR |
| 15 साल | ~11% CAGR | ~7.5% CAGR |
विप्रो बायबैक: टैक्स के नियम और निवेश की स्ट्रैटेजी
निवेशकों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि बायबैक से होने वाली कमाई पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है, क्योंकि कंपनी खुद बायबैक टैक्स चुकाती है। बैंक एफडी की तुलना में विप्रो का शानदार CAGR इसे और भी आकर्षक बनाता है। ऑफर खत्म होने के बाद, स्वीकार किए गए शेयर आपके डीमैट अकाउंट से डेबिट हो जाएंगे और उनका पैसा जून के आखिर तक आपके लिंक किए गए बैंक खाते में आ जाएगा।
अगर आप इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं, तो आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए जल्द कदम उठाएं। एक्सेप्टेंस रेशियो के ट्रेंड पर नजर रखें ताकि आप तय कर सकें कि आपको अपनी पात्रता से ज्यादा शेयर टेंडर करने चाहिए या नहीं। यह स्ट्रैटेजी आपके पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करते हुए मुनाफे को बढ़ाने में मदद कर सकती है। बेहतर होगा कि अपनी टैक्स कैटेगरी के हिसाब से सही फैसला लेने के लिए किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लें।


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