RBI की जून बैठक: क्या आपकी EMI बढ़ेगी या FD पर मिलेगा ज्यादा मुनाफा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 3 से 5 जून तक अहम बैठक होने जा रही है। इस मीटिंग में लिए गए फैसले का सीधा असर आपकी जेब यानी होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर पड़ने वाला है। निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि रेपो रेट में कटौती के संकेत मिलते हैं या दरें स्थिर रहती हैं। इन फैसलों के आधार पर ही आप अपनी बैंक सेविंग्स और SIP की बेहतर प्लानिंग कर पाएंगे।

ज्यादातर जानकारों का मानना है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। कर्ज लेने वालों के लिए इसका मतलब है कि उनके होम लोन की किस्तें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं। रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकों को अपना लेंडिंग मार्जिन एडजस्ट करने का मौका मिलता है। अगर भविष्य में दरें कम होती हैं, तो लॉन्ग-टर्म लोन पर आप ब्याज के रूप में हजारों रुपये बचा सकेंगे।

RBI Policy June 2026: Impact on Home Loan EMI and Fixed Deposit Rates - What Investors Should Know

लोन EMI पर RBI पॉलिसी का असर

लोन की ब्याज दर (%)मंथली EMI (प्रति ₹10 लाख)कुल ब्याज (20 साल में)
8.50%₹8,678₹10.82 लाख
8.75%₹8,837₹11.21 लाख
9.00%₹8,997₹11.59 लाख

रेपो रेट में मामूली बदलाव भी आपके लोन चुकाने के शेड्यूल को काफी हद तक बदल देता है। दरें घटने पर हर 10 लाख रुपये के लोन पर आपकी मंथली किस्त कम हो जाती है। नए कर्जदारों के लिए यह बचत समय के साथ काफी बढ़ जाती है। यह जरूर चेक करें कि आपका मौजूदा लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से लिंक है या नहीं।

RBI पॉलिसी के बीच FD पर ऐसे पाएं ज्यादा मुनाफा

निवेश की अवधिअनुमानित ब्याज दरअनुमानित वैल्यू (₹1 लाख पर)
5 साल7.25%₹1.43 लाख
10 साल7.00%₹2.01 लाख
15 साल6.75%₹2.75 लाख

बैंक डिपॉजिटर्स के लिए यह समय काफी अच्छा है क्योंकि फिलहाल ब्याज दरें पिछले कई सालों के मुकाबले ऊंचे स्तर पर हैं। आप 'लैडरिंग स्ट्रैटेजी' (Laddering Strategy) अपना सकते हैं, जिसमें अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड के लिए पैसा निवेश किया जाता है। इससे आपके पास कैश भी बना रहता है और आप लंबे समय के लिए ज्यादा रिटर्न भी पक्का कर लेते हैं। ब्याज दरों में कटौती की संभावना से पहले ही निवेश करना समझदारी होगी।

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर भी आरबीआई के महंगाई को लेकर रुख का असर पड़ता है। वहीं, अगर ब्याज दरें गिरती हैं, तो लॉन्ग-ड्यूरेशन वाले डेट फंड्स को फायदा हो सकता है। 5 जून के फैसले के बाद अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें ताकि आपका एसेट एलोकेशन आपकी जरूरतों के हिसाब से सही बना रहे। सही समय पर लिया गया फैसला आपके निवेश को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रख सकता है।

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