नई दिल्ली, जुलाई 18। फाइनेंशियल वर्ल्ड के की भरपूर जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद यह कहना गलत नहीं होगा कि आम भारतीय निवेशक अभी भी बॉन्ड बाजार में निवेश से जुड़े फायदों और सेफ्टी की पूरी जानकारी नहीं रखते। बॉन्ड मार्केट दूसरे निवेश ऑप्शनों जैसे कि इक्विटी, रियल एस्टेट आदि के बिल्कुल विपरीत है। देश और विदेश में अस्थिरता और अनिश्चितता के कारण अपने निवेश को डायवर्सिफाई (अलग-अलग ऑप्शनों में फैलाना) करना अक्लमंदी है और इस काम में बॉन्ड आपकी मदद कर सकते हैं। मगर बॉन्ड मार्केट से पैसा कमाने के लिए आपको कुछ खास बातों की जानकारी होनी चाहिए। यहां हम आपको बॉन्ड मार्केट से पैसा कमाने के लिए 5 जरूरी टिप्स शेयर करेंगे।
बॉन्ड की मैच्योरिटी आपके निवेश लक्ष्य के अनुसार हो
उदाहरण के लिए, यदि आप किसी खास लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक बार में मोटी राशि का निवेश करना चाहते हैं (जैसे आपके बच्चे की शिक्षा या नया घर आदि) तो आपके दिमाग में एक समयरेखा होगी जैसे, 5 साल या 7 साल। इसलिए, बांड की मैच्योरिटी भी उसी के साथ मेल खानी चाहिए। यदि आपका बॉन्ड 7 साल के बाद मैच्योर होता है और आपको 5 साल में पैसे की आवश्यकता होती है, तो आपको या तो एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा या बॉन्ड की शर्तों के आधार पर 2 साल तक प्रतीक्षा करनी होगी।
मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स
बांड मुद्रास्फीति के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। ब्याज दरें बढ़ने के साथ ही इनकी वैल्यू गिरती है। बांड की मैच्योरिटी से पहले ब्याज दरों में बदलाव के जोखिम को ब्याज दर जोखिम के नाम से जाना जाता है। ये मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स अक्सर एक आम निवेशक को बॉन्ड बाजारों में प्रवेश करने से रोकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सबसे बड़े अर्थशास्त्रियों के लिए भी, ब्याज दर में उतार-चढ़ाव की सटीक भविष्यवाणी करना असंभव है। इसलिए, बाजारों को समय देने के बजाय, हमें अपने निवेश की संरचना इस तरह से तैयार करनी चाहिए कि लंबी अवधि के लक्ष्य प्राप्त हो सकें।
बॉन्ड यील्ड और रेटिंग
बॉन्ड की रेटिंग जितनी अधिक होगी, उसकी साख उतनी ही बेहतर होगी और डिफ़ॉल्ट की संभावना उतनी ही कम होगी। बॉन्ड यील्ड और रेटिंग व्युत्क्रमानुपाती हैं। इसका मतलब है कि अधिक यील्ड वाले बॉन्ड की रेटिंग कम होगी और कम यील्ड वाले बॉन्ड की रेटिंग अधिक। इसलिए, एक निवेशक जो अपने निवेश को सुरक्षित रखना चाहता है उसे हाई-रेटेड बॉन्ड (ए और ऊपर) को चुनना चाहिए।
बॉन्ड जारी करने वाला
बांड जारी करने वाली कंपनी की अच्छी समझ होना अनिवार्य है। इसका मुख्य व्यवसाय, मार्केट प्लेसमेंट, उद्योग में स्थिति, प्रतिस्पर्धी और प्रमोटर इतिहास सब कुछ जानें। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां निवेशकों ने खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों के बॉन्ड में निवेश करके नुकसान कर लिया। उन्होंने बाजार से अधिक रिटर्न की उम्मीद की, पर नुकसान हो गया।
बॉन्ड प्रॉस्पेक्टस और बॉन्ड जारी करने वाले ब्रोकर
बॉन्ड प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से पढ़ना चाहिए और समझना चाहिए कि फंड कहां और कैसे आवंटित किया जा रहा है। दूसरे भारत में, जहां बांड निवेश अभी भी रिटेल निवेशकों के लिए कम एक्सपोजर वाली जगह है, आपको किसी प्रसिद्ध प्लेटफॉर्म या ब्रोकर के माध्यम से निवेश करना चाहिए। बांड निवेश से जुड़े शुल्क और कमीशन की पूरी समझ होना भी जरूरी है।
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