भारत के शहरों में सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय भावों पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते हैं तो कई शहरों में ज़्यादा महंगा सोना पड़ता है।
यदि आप भारत में सोने के दामों पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि देश के हर शहर में सोने के भाव अलग-अलग हैं। कई शहरों में सोना महंगा होता है तो कई शहरों में सस्ता। तो भारत में सोने के भाव आखिर कैसे तय होतें हैं, आइये देखें...
भारत के शहरों में सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय भावों पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते हैं तो कई शहरों में ज़्यादा महंगा सोना पड़ता है। हमारे यहां सोने की खानें ज़्यादा नहीं है हमें अपनी ज़रूरत का सोना आयात करना पड़ता है। भारत में सरकारी और निजी बैंक सोना आयात करते हैं , साथ ही कुछ एजेंसीज भी हैं जो कि विदेश से सोना खरीदकर डीलर्स को भेजती हैं। आयात करने वालों की ये सूची बदलती रहती है और सरकार इसमें बदलाव करती रहती है। यहां पढ़ें- 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने में अंतर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, मिनरल और मेटल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन, यूनियन बैंक, सिंडीकेट बैंक आदि सोने के आयातक हैं। भारत में 38 बैंक हैं जो सोना बाहर से खरीदते हैं। बाद में ये बैंक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत का हिसाब लगाकर उसे भारत की मुद्रा में बदलते हैं फिर उस पर आयात शुल्क लगा देते हैं। इस तरह इसका भारत में सोने का भाव तय होता है। यहां पढ़ें- सोने खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान कीमतें शहरों के बुलियन एसोसिएशन द्वारा निर्धारित होती है, जैसे कि मुंबई। उदाहरण के लिए मुंबई में आईबीजेए (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन), सोने का डीलर्स का एक एसोसिएशन हैं जहां उनके द्वारा कीमतें निर्धारित होती हैं बाद में इन्हें रिटेलर्स तक भेज दिया जाता है। इसके बाद रेट को पूरी तरह निर्धारित करने के लिए ये बड़े डीलर्स से संपर्क करते हैं और भविष्य की कीमतें तय करते हैं। दुनिया के किस देश के पास है सबसे ज्यादा सोना अलग-अलग राज्यों में सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। कुछ राज्यों में ट्रांसपोर्ट कोस्ट या परिवहन लागत ज़्यादा होती है। कुछ लोग मानते हैं कि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में सोने के भाव कम होते हैं क्यों कि यहां के बन्दरगाहों सोना सीधा पहुंचता है और अन्य लागतें बच जाती हैं। केवल ये ही कारण नहीं है कुछ अन्य कारण भी शहरों में सोने के इन भावों को प्रभावित करते हैं। आखिर कितना सोना विदेश से ला सकते हैं आप सोने के भाव तय करने में करेंसी भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। उदाहरण के लिए, जैसे हमें सोना आयात करना होता है और इसका भुगतान डॉलर में करना होता है। अब यदि रुपए की कीमत डॉलर के मुक़ाबले 67 या 68 रुपए तक गिर जाती है तो हमें सोने के लिए 1 रुपया ज़्यादा देना पड़ेगा। जितना ज़्यादा सोना आयात किया जाएगा विदेशी विनिमय यानि फ़ोरेन एक्स्चेंज रिज़र्व भी देश में उतना ही ज़्यादा फ़्लो करेगा। यहां देखिए अपने शहर में सोने और चांदी के दाम
सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय भावों पर निर्भर करते हैं
भारत में सोना कौन लाता है?
ये अंतिम खुदरा भाव नहीं है
सोने के भावों की गणना करने के अन्य तरीके
अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग-अलग क्यों होते हैं?
विनिमय की भी महत्वपूर्ण भूमिका है
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