नयी दिल्ली। नया साल जल्द ही आने वाला है, मगर यह आपके लिए थोड़ा खर्चीला साबित हो सकता है। दरअसल सू्त्रों के हवाले से खबर है कि 2020 में जनरल या सामान्य बीमा प्रीमियम में 10-15% की बढ़ोतरी हो सकती है। यानी आपको 2020 की शुरुआत से ही अपने सामान्य बीमा के प्रीमियम के लिए 10 से 15% अधिक शुल्क देना होगा। इसका कारण पुनर्बीमा यानी रीइंश्योरेंस दरों में वृद्धि है, जिसका भुगतान बीमा कंपनियों को एक कवर सुरक्षित करने के लिए करना होता है। असल में अगले साल से समान जोखिम सुरक्षा के लिए कंपनियों को अधिक राशि का भुगतान करना पड़ेगा। यानी बीमा कंपनियाँ रीइंश्योरेंस में बढ़ी हुई राशि का भार अपने उपभोक्ताओं पर डालने जा रही हैं। बढ़े हुए प्रीमियम के दायरे में नयी और पुरानी दोनों तरह की बीमा पॉलिसीयाँ आयेंगी, फिर चाहे वे व्यक्तिगत या सामूहिक बीमा हो। रीइंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट्स का नवीकरण 1 जनवरी से शुरू होता है।

इन बीमाधारकों को देना होगा ज्यादा प्रीमियम
सूत्रों के अनुसार जिन सेगमेंट में प्रीमियम में 10-15% की बढ़ोतरी होगी, उनमें लायबिलिटी इंश्योरेंस, फायर इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस और ग्रुप हेल्थ कवर शामिल हैं। हालाँकि इस बात की भी संभावना है कि कुछ कंपनियाँ अपने ग्राहकों को छूट देना जारी रखें। गौरतलब है कि कभी-कभी किसी एक सेगमेंट में बड़े क्लेम के चलते बीमा कंपनी के कुल क्लेम घाटे में बढ़ोतरी हो जाती है। जैसे वित्त वर्ष 2020 में बाढ़ से उत्पादन प्रभावित होने की घटनाओं के कारण फसल बीमा नुकसान अधिक रहा है। यह भी प्रीमियम में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह है।
क्या है प्रीमियम बढ़ने की असल वजह
बता दें कि 1 जनवरी से रीइंश्योरेंस के अनुबंधों का नवीनीकरण होगा, जिसके बाद प्रीमियम राशि बढ़ेगी। मगर इसके अलावा बीमा कारोबार में अधिक जोखिम होने से बीमा कंपनियों को गैर-जीवन बीमा पॉलिसी को रीइंश्योर्ड करवाने की जरूरत होती है। मतलब खुद बीमा कंपनियों को भी अपने लिए कवर लेना पड़ता है। सामान्य बीमा सेक्टर की कंपनियों के लिए प्रीमियम के मामले में घरेलू और विदेशी दोनों तरह के कारक प्रभावी होते हैं। यानी सामान्य बीमा का प्रीमियम आंतरिक और बाहरी दोनों कारकों के आधार पर तय किया जाता है, क्योंकि कई रीइंश्योरेंस कंपनियाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर की भी होती हैं।
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