SIP vs RD: आपको पैसे के इनवेस्टमेंट में हो रही है दिक्कत, जानिए क्या है दोनों में फर्क

SIP vs RD: आपकी जानकारी के लिए बताते चले कि लोगों के पास निवेश के कई तरीके होते हैं। ऐसे में मुख्य रूप से दो तरह के निवेशक देखे जाते हैं। पहले ऐसे इन्वेस्टर होते हैं जिन्हें जोखिम का कोई खतरा नहीं होता है वह अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ इन्वेस्टर्स ज्यादा रिटर्न की लालच में नहीं पड़ते हैं और अपने पैसे को सुरक्षित रखते हैं। तो ऐसे में अगर आप पैसा इन्वेस्ट करना चाह रहे हैं तो आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आएगा कि रिकरिंग डिपॉजिट और म्युचुअल फंड में ज्यादा बेहतर कौन है।

हालांकि इस बात का जवाब इतना आसान भी नहीं है। आमतौर पर यह आपकी जरूरत पर डिपेंड करता है कि कौन सी सेविंग स्कीम आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकती है। ये म्युचुअल दफंड एसआईपी के मामले में, ईएलएसएस के अलावा कोई लॉक-इन अवधि नहीं है।

SIP

सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान

म्युचुअल फंड में निवेश के लिए सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) एक बेहतर निवेश रणनीति है। एसआईपी को आम तौर पर रुपए की औसत लागत के बारे में जाना जाता है। गौरतलब है कि आपको कम से कम से 500 रुपए से 1000 रुपए का मिनिमम एक्सपीरियंस है।

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में शेयर बाजार के मुकाबले कम जोखिम होता है। अगर आप इसमें लंबे समय का इन्वेस्टमेंट करते हैं, तो आपका फायदा बढ़ता जाता है और जोखिम कम होता जाता है। इसीलिए लोग अक्सर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्लान करते हैं ताकि म्युचुअल फंड के जरिए उन्हें 12 प्रतिशत या उससे ऊपर का रिटर्न मिले।

तो अगर आप थोड़ा जोखिम उठाकर बेहतर फंड इकट्ठा करना चाहते हैं तो म्युचुअल फंड आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। हालांकि इसमें आप एक्सपर्ट की सलाह लेकर इन्वेस्टमेंट करते हैं तो फायदा जबरदस्त होता है और रिस्क काफी ज्यादा काम हो जाता है। एसआईपी के जोखिम को कम करने के लिए इक्विटी में पैसे इनवेस्ट कर सकते हैं।

रेकरिंग डिपॉजिट

रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) निवेशकों के बीच बहुत पॉपुलर है। आरडी परंपरागत निवेशकों के लिए एक लोकप्रिय निवेश विकल्प है।

यह स्कीम खास तौर पर उन लोगों के लिए सही है जो अपने पैसे को सुरक्षित रखना चाहते हैं। इस स्कीम पर आपको बैंक के द्वारा 8 से 9 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया जा सकता है।

इसमें आप सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की तरह हर महीने पैसे इन्वेस्ट कर सकते हैं। आपकी पसंद के आधार पर व्याकरण के प्रोजेक्ट का टाइम पीरियड 6 महीने से लेकर 10 साल तक का होता है।

अब तो लोगों के लिए रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम खोलना काफी आसान हो गया है। क्योंकि वह आप को इंटरनेट बैंकिंग प्लेटफार्म के जरिए शुरू करने की सुविधा भी दे दी गई है।

रिकरिंग डिपॉजिट यानी आरडी पर आपको सामान्य रिटर्न 7 प्रतिशत से 8 प्रतिशत का इंटरेस्ट रिटर्न मिलता है। लेकिन एफडी पर आपको 12 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल सकता है।

रिकरिंग डिपॉजिट में आपका पैसा सुरक्षित तो रहता है लेकिन आपको फायदा ज्यादा नहीं मिलता है। वही म्युचुअल फंड में मार्केट रेट्स तो शामिल होता है पर उसका इंटरेस्ट रेट भी बढ़ता जाता है।

रिकरिंग डिपॉजिट में लगा हुआ पैसा आप पैसा में से पहले नहीं निकाल सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको चार्ज किया जाता है। लेकिन म्युचुअल फंड में इस तरह की कोई बाध्यता नहीं है। आप बड़ी आसानी से अपने पैसे निकाल सकते हैं और आप पर कोई एग्जिट लोड भी नहीं पड़ता है।

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