आरबीआई (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 से 5 जून तक होने वाली है, जिसका फैसला 5 जून को आएगा। 8 अप्रैल से रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार है और फिलहाल रुख न्यूट्रल बना हुआ है। हालिया ऑक्शन में एक साल के ट्रेजरी बिल (T-Bills) 5.6 से 5.8 प्रतिशत के करीब रहे हैं। वहीं, बड़े बैंकों में एक साल की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर फिलहाल करीब 6.5 से 7.5 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। ऐसे में अपनी कैश की जरूरत, टैक्स स्लैब और लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर अभी सही फैसला लें।
पॉलिसी से पहले इस क्विक चेकलिस्ट की मदद लें। तीन महीने के लिए एक्स्ट्रा कैश को लिक्विड फंड या 91 दिनों के T-Bills में लगाएं। सुरक्षा के लिहाज से 364 दिनों के T-Bills बेहतर हैं, क्योंकि रिडेम्पशन के समय कोई TDS नहीं कटता। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचने के लिए 6 से 18 महीने की 'FD लैडर' (टुकड़ों में एफडी) बनाएं। अपनी इक्विटी SIP में कोई बदलाव न करें; पॉलिसी के फैसलों का लॉन्ग-टर्म रिटर्न पर शायद ही कोई असर पड़ता है। ध्यान रहे, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड यूनिट्स पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। बैंक एफडी के ब्याज पर एक तय सीमा के बाद TDS कटता है; अगर आप पात्र हैं, तो फॉर्म 15G या 15H जरूर जमा करें।

FD बनाम डेट फंड बनाम T-bills: ब्याज दरें और टैक्स
| इंस्ट्रूमेंट | मौजूदा अनुमानित यील्ड (टैक्स से पहले) | टैक्स नियम (न्यू रिजीम) | लिक्विडिटी/लॉक-इन | अभी क्यों चुनें |
|---|---|---|---|---|
| बैंक FD (1 साल) | 6.5%–7.5% | ब्याज पर स्लैब के हिसाब से टैक्स; लिमिट से ऊपर TDS | लॉक-इन; समय से पहले निकालने पर पेनल्टी | तय खर्चों के लिए ब्याज की गारंटी |
| 364-दिन का ट्रेजरी बिल | ~5.6%–5.8% | डिस्काउंट गेन पर स्लैब के हिसाब से टैक्स; कोई TDS नहीं | ट्रेडेबल; T+1 सेटलमेंट | सरकारी सुरक्षा और फिक्स्ड रिटर्न |
| लिक्विड/अल्ट्रा-शॉर्ट डेट फंड | ओवरनाइट/T-bill यील्ड के मुताबिक (खर्च घटाकर) | अप्रैल 2023 के बाद के यूनिट्स पर स्लैब के हिसाब से टैक्स | T+1 रिडेम्पशन | निवेश और लैडरिंग में लचीलापन |
RBI पॉलिसी हफ्ता: 5 जून से पहले रिस्क और समय के हिसाब से क्या चुनें
| समय की जरूरत | रिस्क लेने की क्षमता | अभी क्या चुनें |
|---|---|---|
| 0–3 महीने | कम | लिक्विड फंड या 91-दिन का T-bill |
| 3–12 महीने | कम | 364-दिन का T-bill; या 6-12 महीने की FD लैडरिंग |
| 12–24 महीने | मध्यम | 6–18 महीने की FD लैडर और रोलिंग T-bills |
| 2–3 साल | कम से मध्यम | ड्यूरेशन फंड्स के लिए थोड़ा रुकें; पॉलिसी के बाद टारगेट-मैच्योरिटी गिल्ट/PSU फंड्स पर विचार करें |
अगर आप एकमुश्त (Lump sum) पैसा लॉक करने को लेकर उलझन में हैं, तो फ्लेक्सिबिलिटी के लिए रिकरिंग डिपॉजिट (RD) चुनें और आज की ब्याज दरों का फायदा उठाएं। अपने लक्ष्यों को अलग-अलग बांटें। इमरजेंसी फंड को T-bills में रखें, जबकि जल्द होने वाले खर्चों के लिए FD लैडरिंग का इस्तेमाल करें। सरप्लस पैसे को शॉर्ट-टर्म डेट फंड में रखा जा सकता है। सीनियर सिटीजन ज्यादा ब्याज वाली एफडी को प्राथमिकता दे सकते हैं। आरडी (RD) के जरिए आप बिना किसी दबाव के अपनी बचत बढ़ा सकते हैं। सिर्फ सबसे ज्यादा ब्याज के चक्कर में न पड़ें, बैंक की पहुंच और डिपॉजिट इंश्योरेंस का भी पूरा ख्याल रखें।
5 जून के बाद आरबीआई के रुख और कमेंट्री को ध्यान से समझें। अगर रेट कट (ब्याज दरों में कटौती) का संकेत मिलता है, तो लंबी अवधि की एफडी को तुरंत लॉक करना समझदारी होगी। अगर रुख सख्त (Hawkish) रहता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने तक T-bills और शॉर्ट-टर्म फंड्स ही बेहतर विकल्प हैं। चाहे जो भी हो, अपनी SIP जारी रखें और इमरजेंसी कैश को हमेशा सुलभ रखें। 5 जून को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले के बाद हम इन सुझावों को फिर से अपडेट करेंगे।


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