भारतीय शेयर बाजार ने 17 जून को नया इतिहास रच दिया। निफ्टी 50 पहली बार 24,000 के पार निकल गया, तो वहीं सेंसेक्स ने भी 77,000 का स्तर पार कर लिया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: डायरेक्ट स्टॉक्स में पैसा लगाएं या म्यूचुअल फंड्स में? निवेश के इन दोनों विकल्पों में रिस्क और रिटर्न का गणित बिल्कुल अलग है।
बाजार की रफ्तार तो तेज है, लेकिन वैल्यूएशन भी काफी ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में एक्सपर्ट्स आपकी रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से अलग-अलग रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। कम रिस्क चाहने वालों के लिए लो-कॉस्ट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) बेहतर हैं, जबकि बैलेंस्ड पोर्टफोलियो के लिए फ्लेक्सी-कैप फंड्स सही रहेंगे। वहीं, जो लोग ज्यादा रिस्क ले सकते हैं, वे डायरेक्ट इक्विटी का रुख कर सकते हैं। सही चुनाव ही आपको बाजार की इस तेजी का असली फायदा दिलाएगा।

निफ्टी 24,000 के पार: म्यूचुअल फंड्स में निवेश और रिस्क का गणित
जब बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर हो, तो स्मॉल-कैप स्टॉक्स में संभलकर निवेश करना चाहिए। इन सेक्टर्स में फिलहाल काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका है, क्योंकि यह गिरावट के समय आपकी लागत को औसत (average) कर देता है। समझदारी इसी में है कि आप अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड्स में शिफ्ट कर लें, ताकि बाजार के शिखर पर रहने के दौरान आपकी पूंजी सुरक्षित रहे।
Nifty Index ETF बनाम फिक्स्ड डिपॉजिट: कहां है ज्यादा फायदा?
इंडेक्स ईटीएफ (Index ETF) का एक्सपेंस रेशियो एक्टिव फंड्स के मुकाबले काफी कम होता है। ज्यादातर ईटीएफ सालाना 0.1% से भी कम चार्ज लेते हैं। हालांकि, ये इंडेक्स के हिसाब से ही चलते हैं और उसे पछाड़ने की कोशिश नहीं करते। टैक्स के नजरिए से भी इक्विटी, फिक्स्ड इनकम के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सुरक्षित तो हैं, लेकिन वे अक्सर महंगाई को मात नहीं दे पाते। यही वजह है कि लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी को ज्यादा पसंद किया जाता है।
| एसेट क्लास | अनुमानित रिटर्न | रिस्क लेवल |
|---|---|---|
| फिक्स्ड डिपॉजिट | 6% - 7.5% | कम |
| इंडेक्स ईटीएफ | 12% - 14% | मध्यम |
| डायरेक्ट इक्विटी | 15%+ | ज्यादा |
निवेशकों को हर छह महीने में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा (rebalance) करनी चाहिए। डेट फंड्स से पैसा धीरे-धीरे शिफ्ट करने के लिए सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) का इस्तेमाल करें, जिससे ऊंचे स्तर पर एकमुश्त निवेश का जोखिम कम हो जाता है। हमेशा क्वालिटी स्टॉक्स की एक चेकलिस्ट बनाकर रखें। बाजार के इस दौर में अनुशासन बनाए रखना बहुत जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचें और लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी पर ध्यान दें।


Click it and Unblock the Notifications