LPG vs PNG New Rule: जल्द ही लाखों भारतीय परिवारों को अपने चूल्हे जलाने के तरीके पर फिर से सोचना होगा। सरकार का एक नया आदेश देश में खाना पकाने वाली गैस के इस्तेमाल के तरीके को बदल रहा है, जिससे लोगों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह पॉलिसी Indane, BharatGas और HP Gas के ग्राहकों के लिए है। इसका मकसद डुप्लिकेट कनेक्शन खत्म करना, सब्सिडी सिस्टम को बेहतर बनाना और सिलेंडर की सप्लाई को उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भेजना है जहां पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है।

क्या है 30 दिन में सरेंडर करने का नियम
इस बदलाव का मुख्य आधार 'लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन का नियमन) संशोधन आदेश, 2026' है, जिसे 25 मई को नोटिफाई किया गया था। इन संशोधित नियमों के तहत, जो परिवार PNG कनेक्शन लेते हैं, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना मौजूदा LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई परिवार 1 जून को PNG कनेक्शन लेता है, तो उन्हें 1 जुलाई तक अपना LPG अकाउंट बंद करना होगा।
इस समय-सीमा का पालन न करने पर LPG रिफिल पर रोक लग सकती है और अकाउंट डीएक्टिवेट भी हो सकता है। सरकार इसे सख्ती से लागू करना चाहती है ताकि घरेलू गैस के दोहरे इस्तेमाल को रोका जा सके और उन इलाकों के लिए सिलेंडर उपलब्ध कराए जा सकें जहां पाइपलाइन की सुविधा नहीं है।
रीफिल का समय पहले जैसा ही रहेगा
अधिकारियों ने सिलेंडर बुकिंग के शेड्यूल में बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों को खारिज कर दिया है। LPG रीफिल के लिए मौजूदा लॉक-इन पीरियड में कोई बदलाव नहीं किया गया है- 25 दिन, 35 दिन या 45 दिन (यह कनेक्शन के प्रकार और जगह पर निर्भर करता है)। हालांकि डुअल-कनेक्शन से जुड़े नियम अब लागू हो गए हैं, लेकिन स्टैंडर्ड सिलेंडर बुकिंग की तय फ्रीक्वेंसी पहले जैसी ही रहेगी।


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